बलौदाबाजार: मंगलवार की सुबह गौर यानी जंगली बायसन ने ऐसा तांडव मचाया कि एक घंटे के भीतर तीन गांव उसकी दहशत में आ गए. इस हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई, जबकि दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं. घटना के बाद पूरे बारनवापारा क्षेत्र में भय, आक्रोश और असुरक्षा का माहौल है. लोग घरों से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं.

पहली मामला- गजराडीह में देवेंद्र साहू पर हमला
सबसे पहले हमला गजराडीह गांव में हुआ. 46 वर्षीय देवेंद्र साहू सुबह अपने काम से निकले थे. अचानक जंगल की ओर से निकला विशालकाय बायसन सीधे उनकी ओर दौड़ पड़ा. लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बायसन ने अपने नुकीले सींगों से देवेंद्र पर हमला कर दिया. हमला इतना खतरनाक था कि उनके पेट पर करीब 4 से 5 इंच गहरा घाव हो गया. कुछ देर बाद ग्रामीणों और परिजनों ने हिम्मत जुटाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. देवेंद्र की मौत के बाद गांव में मातम छा गया.
दूसरा हमला: मुरूमडीह में महिला को बनाया निशाना
गजराडीह में हमला करने के बाद बायसन का आतंक खत्म नहीं हुआ. वह तेजी से आगे बढ़ते हुए मुरूमडीह गांव पहुंच गया. यहां 36 वर्षीय पंचबाई ठाकुर जंगल किनारे मौजूद थीं. अचानक बायसन ने उन पर हमला कर दिया. हमले में उनकी जांघ पर गंभीर चोट आई. ग्रामीणों ने शोर मचाकर किसी तरह बायसन को वहां से भगाया और घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया. घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई.
तीसरा हमला: रवान गांव में फिर मचा हड़कंप
एक घंटे के भीतर बायसन तीसरे गांव रवान पहुंच गया. यहां उसने 60 वर्षीय गायत्री यादव पर हमला कर दिया. बायसन ने उन्हें इतनी जोर से टक्कर मारी कि उनकी जांघ में गहराई तक चोट आई है. डॉक्टरों को उनके पैर में 8 से 9 टांके लगाने पड़े. फिलहाल उनका इलाज जारी है. लगातार तीन गांवों में हुए हमलों ने पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है.
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी दहशत
लोगों का कहना है कि पहले भी जंगल के आसपास जंगली जानवरों की हलचल देखी जाती थी, लेकिन इस तरह आबादी वाले इलाकों में घुसकर लगातार हमला करने की घटना पहली बार सामने आई है. ग्रामीणों का कहना है कि अब सुबह-सुबह जंगल या खेत की ओर जाने में डर लग रहा है. तेंदूपत्ता सीजन के कारण बड़ी संख्या में लोग रोज जंगल जाते हैं, ऐसे में खतरा और बढ़ गया है.
वन विभाग पर उठे सवाल
घटना के बाद लोगों का गुस्सा वन विभाग पर फूट पड़ा. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में जंगली वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी होने के बावजूद समय रहते कोई चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया गया. लोगों का कहना है कि अगर गांवों को पहले से सतर्क किया जाता, तो शायद इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी. कई ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग की टीम अक्सर घटना के बाद ही सक्रिय होती है. लोगों ने मृतक देवेंद्र साहू के परिवार को उचित मुआवजा देने परिवार के एक सदस्य को सरकारी सहायता देने और घायल महिलाओं का मुफ्त इलाज की मांग की है.
