नई दिल्ली: नकली कीटनाशक खेत, किसान और खाद्य सुरक्षा तीनों संकट में – मध्यप्रदेश के देवास जिले में बायर और इंडोफिल जैसी नामी कंपनियों के नाम पर नकली कीटनाशकों एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की पैकिंग का खुलासा केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और किसानों के विश्वास पर सीधा हमला है। यह मामला साफ संकेत देता है कि प्रदेश में नकली कृषि आदानों का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो किसानों की मेहनत, फसलों और भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।

कृषि विभाग और पुलिस द्वारा समय रहते की गई कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित तथा पुरस्कृत किया जाना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में सख्त कार्रवाई का स्पष्ट संदेश जाए। देवास प्रकरण में जिस प्रकार ब्रांडेड कंपनियों जैसी हुबहू पैकिंग सामग्री, लेबल और आधुनिक प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल सामने आया है, उससे स्पष्ट है कि यह कारोबार योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था। केवल एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई पूरी मान लेना पर्याम नहीं होगा। नकली रसायनों, पैकेजिंग सामग्री और सप्लाई नेटवर्क के खोत तक पहुंचकर आर्थिक अपराध शाखा, साइबर और खुफिया एजेंसियों की मदद से पूरे गिरोह का पर्दाफाश करना अब अत्यंत आवश्यक है।
निर्णायक चोट हो
देश के कृषि मंत्री समय समय पर नकली और मिलावटी कृषि आदानों पर चिंता व्यक्त करते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक ऐसी कठोर और प्रभावी राष्ट्रीय कार्ययोजना दिखाई नहीं देती, जो इस संगठित अपराध पर निर्णायक प्रहार कर सके। बैठकों और बयानबाजी से नहीं, बल्कि राज्यों, कृषि विभाग, पुलिस, कीटनाशक कंपनियों और खुफिया एजेंसियों को संयुक्त एवं सतत कार्रवाई से ही किसानों को राहत मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया था कि भारत में नकली कोटनाशकों का कारोबार अरबों रूपये तक पहुंच चुका है और यह कूल बाजार के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित कर सकता है। ‘एग्रोकेमिकल्स पॉलिसी ग्रुप (APG) की रिपोटों के अनुसार देश में नकली कीटनाशकों का कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि इनके कारण किसानों को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये की फसल हानि होने का अनुमान जताया है I यह स्थिति बताती है कि नकली उत्पाद केवल किसानों की जेब नहीं काटते, बल्कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए भी S गंभीर खतरा बन चुके हैं।
वैश्विक साख पर असर
विश्व स्तर पर खाद्या गुणवत्ता को लेकर निगरानी लगातार बढ़ रही है। यूरोप और खाड़ी देशों ने कई बार भारतीय कृषि उत्पादों में अत्यधिक रासायनिक अवशेषों पर चिंता जताई है यदि नकली और घटिया कीटनाशकों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो भारत के कृषि निर्यात और वैश्विक साथ दोनों पर विपरीत असर पड़ सकता है यह केवल खेत का मामला नहीं बल्कि देश के अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता का भी प्रश्न है I
पर्यावरण को खतरा
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) भी समय-समय पर चेतावनी देता रहा है कि जहरीले और अवैध रसायनों का अनियंत्रित उपयोग मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर खतरा है। उद्योग संगठनों के अध्ययन में कई नकली कीटनाशकों में सक्रिय रसायनों के स्थान पर टैल्कम पाउडर, चॉक पाउडर और मिट्टी के तेल जैसे पदार्थ पाए जाने की बात सामने आई है। किसान पैकिंग पर लिखे रासायनिक नाम और कंपनियों के लोगो देखकर इन्हें असली समझ लेते हैं, जबकि उनमें फसल सुरक्षा के लिए आवश्यक सक्रिय तत्व मौजूद ही नहीं होते। इसके दुष्परिणाम मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी, भूजल प्रदूषण, फलों सब्जियों में रासायनिक अवशेषियों की वृद्धि तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ सकते हैं
यदि अब भी नकली कृषि आदानों के इस काले कारोबार पर निर्णायक प्रहार नहीं हुआ, तो इसकी कीमत केवल किसान ही नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, कृषि निर्यात और आने वाली पीड़ियों को भी चुकानी पड़ेगी।
किसान के साथ धोखा
देश का किसान पहले ही मौसम की अनिश्चितता, चढ़ती लागत और बाजार के जोखिमों से जूझ रहा है। ऐसे में यदि उसे असली दवा के नाम पर नकली कीटनाशक बेच दिया जाए, तो यह केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं बल्कि उसके पूरे भविष्य के साथ खिलवाड़ है। किसान फसल बचाने के लिए कर्ज लेकर दवाएं खरीदता है। जब दवा असर नहीं करती, तो फसल चौपट होती है, उत्पादन घटता है और किसान मानसिक तनाव में चला जाता है। लगातार नुकसान कई बार किसानों को आत्महत्या जैसे कदम तक धकेल देता है।
कीटनाशक उद्योग चिंतित
क्रॉपलाइफ इंडिया और क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे उद्योग संगठनों ने भी लगातार चिंता जताई है कि नकली और मिसन्ब्रांडेड उत्पाद न केवल किसानों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की साख और वैज्ञानिक अनुसंधान की भी कमजोर करते हैं। उद्योग जगत लंबे समय से यह चेतावनी देता रहा है कि मौजूदा कानून और मामूली जुमनि इस अवैध कारोबार को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
विशेष टास्क फोर्स बने
प्रदेश और केंद्र सरकार को ऐसे मामलों के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन करना चाहिए। केंद्रीय कृषि मंत्रालय को राज्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर ‘एंटी-काउंटरफिट एयी इनपुट मिशन’ जैसी सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए। गांव स्तर तक मजबूत निगरानी नेटवर्क और त्वरित्त सूचना तंत्र विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। साथ ही किसानों को भी जागरूक करना होगा कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही कृषि आदान खरीदें, बिल अवश्य लें और पैकिंग पर वैच नंबर व कंपनी की जानकारी जांचें। कृषि विभाग को गांव-गांव अभियान चलाकर नकली उत्पादों की पहचान और शिकायत व्यवस्था को मजबूत करें
