रायपुर: रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में शुक्रवार से तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव की शुरुआत हुई. राज्यपाल रमेन डेका ने इस महोत्सव का शुभारंभ किया.इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद थे. इस राष्ट्रीय आम महोत्सव में लगभग ढाई सौ प्रजाति के आम के किस्म की प्रदर्शनी लगाई गई है. जिसमें आम की विदेशी किस्में में भी शामिल है. इस प्रदर्शनी में पांच राज्य के आम उत्पादक किसान पहुंचे हुए हैं. किसानों की आय वृद्धि में आम उत्पादन बहुत ही सहायक है.

सीएम ने आम प्रेमियों को दी बधाई
इस मौके पर सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय आम महोत्सव की शुरुआत हुई है. जो आने वाले तीन दिनों तक चलेगा. राष्ट्रीय आम महोत्सव का शुभारंभ प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका ने किया है. इस प्रदर्शनी में पांच राज्य के आम उत्पादक किसान पहुंचे हैं. इस प्रदर्शनी में आम की लगभग ढाई सौ प्रजाति रखी गई है. इस प्रदर्शनी में छोटे से छोटे आम से लेकर बड़े से बड़ा आम जिसे हाथीझूल कहा जाता है. इस आम का उत्पादन बीजापुर में होता है. हाथीझूल के एक आम का वजन ढाई से 3 किलोग्राम होता है.
रायपुर में राष्ट्रीय आम महोत्सव का आगाज (ETV BHARAT)
आम फलों का राजा कहलाता है. किसानों की आय वृद्धि में आम की खेती बहुत ही सहायक है. हमें यहां से ज्यादा से ज्यादा आम एक्सपोर्ट करने की जरूरत है, इसके लिए रायपुर का कृषि विश्वविद्यालय और उद्यानिकी विभाग भी लगा हुआ है. मैं उनको बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं- विष्णुदेव साय, सीएम, छत्तीसगढ़
नक्सलवाद पर सीएम साय का बयान
नक्सलवाद को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त हो गया है. नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प केंद्रीय गृह मंत्री का था. 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का जिसमें अधिक मात्रा में छत्तीसगढ़ में नक्सली थे. करीब 3 चौथाई नक्सलवाद छत्तीसगढ़ में बचा था. डबल इंजन की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद और केंद्रीय गृह मंत्री की दृढ़ इच्छा शक्ति से यह संभव हुआ है. इसके साथ ही जवानों का अदम्य साहस और उस क्षेत्र की जनता के समर्थन से नक्सलवाद का अंत हुआ है. क्षेत्र में तेजी से विकास करने की आवश्यकता है, जिसको हम लोग कर रहे हैं.
मीसाबंदियों के मुद्दे पर सीएम ने कांग्रेस को घेरा
सीएम साय ने मीसाबंदियों के सवाल पर कहा कि जो कांग्रेस संविधान की बात करती है. 1975 में संविधान को ताक पर रखकर इमरजेंसी लागू किया. इसके साथ ही जितने भी गैर कांग्रेसी लीडर थे. उन सब को जेल में डालने का काम किया. 19-19 महीने तक जेल में रहे. इसके कारण कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी की समस्या आ गई. इसकी वजह से कई लोगों का परिवार बर्बाद हो गया. आखिर इन सब का जिम्मेदार कौन है. कांग्रेस पार्टी है. आज अगर ऐसे मीसाबंदियों को हम सम्मान करते हैं. यह केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों में भी है. ऐसे में इस तरह की बात कहने का कांग्रेस को कोई अधिकार नहीं है. कांग्रेस मुद्दा विहीन है. आज यह अपना अस्तित्व खो चुकी है. आज कांग्रेस पार्टी के पास कोई मुद्दा नहीं है. इसलिए उल जुलूल का मुद्दा उठाते हैं.
