नकटी के विस्थापित बच्चों की शिक्षा के लिए आगे आया बाल संरक्षण आयोग
अतिक्रमण हटाने के बाद जिन परिवारों को नया रायपुर में आवास आवंटित किए गए हैं, उनके आसपास दूर दूर तक कोई प्राथमिक विद्यालय नहीं है.
रायपुर: नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए प्रस्तावित जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है. विस्थापन के इस दौर में इन परिवारों के सामने आशियाना खोने के दर्द के साथ-साथ जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की एक नई और बेहद कठिन चुनौती खड़ी हो गई है. तेजी से किए गए इस विस्थापन के बीच एक सबसे बड़ी लापरवाही छत्तीसगढ़ के भविष्य, यानी वहां के मासूम बच्चों की शिक्षा को लेकर सामने आई है. नकटी गांव के प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले इन बच्चों की पूरी पढ़ाई की लाइन ही बिखर गई है, क्योंकि नया रायपुर के सेक्टर 30 में जिस जगह पर इन्हें विस्थापित किया गया है, वहां बच्चों को बुनियादी शिक्षा मुहैया कराने के लिए कोई सरकारी ढांचा या संरचना मौजूद नहीं है.

नए ठिकाने पर न स्कूल, न सुविधाएं और न ही कोई स्पष्ट जवाब
अतिक्रमण हटाने के बाद जिन परिवारों को नया रायपुर में आवास आवंटित किए गए हैं, उनके आसपास दूर-दूर तक कोई प्राथमिक विद्यालय नहीं है. इस विस्थापित आबादी में कई ऐसे परिवार भी शामिल हैं जिनके बच्चे पहले निजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, लेकिन नए क्षेत्र के निजी स्कूल इतने महंगे हैं कि उनकी फीस चुकाना इन गरीब परिवारों के लिए महज एक अधूरा सपना बनकर रह गया है. बुनियादी सुविधाओं के नाम पर भी वर्तमान में स्थितियां बेहद चिंताजनक हैं.जिम्मेदार पदाधिकारी अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि विस्थापित क्षेत्र में बिजली, पानी और सबसे महत्वपूर्ण-शिक्षा की मुकम्मल व्यवस्था कब तक की जाएगी, अधिकारियों की इस चुप्पी ने विस्थापितों के भीतर अपने बच्चों के अनिश्चित भविष्य को लेकर डर और गहरी चिंता पैदा कर दी है.
ईटीवी भारत की पड़ताल और बाल संरक्षण आयोग का कड़ा रुख
इस पूरे मामले और बच्चों की शिक्षा पर मंडराते संकट को लेकर जब ‘ईटीवी भारत’ ने राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा से संपर्क साधा, तो उन्होंने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया. शुरुआती तौर पर विस्थापित क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय की अनुपलब्धता की पुख्ता जानकारी न होने की बात कहते हुए उन्होंने तुरंत इस पर संज्ञान लिया. अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि आयोग की एक विशेष जांच टीम बहुत जल्द विस्थापित स्थल का दौरा करेगी. यह टीम धरातल पर जाकर बच्चों की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि प्रशासनिक विस्थापन के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई-लिखाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े.
आश्वासन: किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होगी बच्चों की पढ़ाई
बाल संरक्षण आयोग ने विस्थापित परिवारों को भरोसा दिलाया है कि बच्चों के हक और उनकी शिक्षा की सुरक्षा के लिए आयोग अपनी हर भूमिका को पूरी मुस्तैदी से निभाएगा. अध्यक्ष वर्णिका शर्मा के अनुसार, टीम के दौरे के बाद बच्चों की पढ़ाई को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. आयोग ने कड़े शब्दों में कहा है कि बच्चों की शिक्षा किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए और इसके लिए प्रशासन को जो भी जरूरी दिशा-निर्देश या कार्रवाई करनी होगी, आयोग उस दिशा में पूरी ताकत से प्रयास करेगा. इस पहल से उजड़े हुए आशियानों के बीच रह रहे परिवारों को अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की एक नई उम्मीद दिखाई देने लगी है.
