- रक्षाबंधन पर वोकल फॉर लोकल को मिला व्यापक जनसमर्थन. अनुमानित 575 से 650 करोड़ रुपए का राखी कारोबार शामिल है.
रायपुर: व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) छत्तीसगढ़ का अनुमान है कि इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर छत्तीसगढ़ में लगभग 715 से 820 करोड़ रुपए का कारोबार होगा. इसमें लगभग 140 से 170 करोड़ रुपए की अतिरिक्त खरीदारी मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, परिधानों, फैशन एक्सेसरीज़, एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स, आभूषणों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और अन्य उपहार वस्तुओं पर हुई.
छत्तीसगढ़ में रक्षाबंधन में हुआ अच्छा बिजनेस
राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर एवं प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों और छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों में रक्षाबंधन को लेकर अच्छी खरीदारी देखने को मिली. बाजारों में राखियों, उपहार सामग्री, मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, परिधानों एवं अन्य वस्तुओं की मांग ज्यादा रही. यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय त्योहार सामाजिक उत्सव के साथ-साथ स्थानीय व्यापार और उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं.
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स का अनुमान (ETV Bharat Chhattisgarh)
राखी, मिठाई, ड्राइफ्रूट्स, कपड़े, मेकअप, गिफ्ट आइटम, सोना चांदी के जेवर की अच्छी बिक्री
कैट छत्तीसगढ़ के बाजार के अनुमान के मुताबिक अतिरिक्त 140 से 170 करोड़ के उत्सव व्यय में लगभग 25 प्रतिशत राशि मिठाइयों एवं ड्राई फ्रूट्स पर, 20 प्रतिशत परिधान एवं फैशन एक्सेसरीज़ पर, 20 प्रतिशत एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स पर, 15 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर, 10 प्रतिशत सोने-चांदी एवं आभूषणों पर और शेष 10 प्रतिशत अन्य उपहार वस्तुओं पर खर्च होने का अनुमान है.
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन अमर पारवानी ने कहा कि भारत केवल उत्सवों और त्योहारों का देश नहीं है. बल्कि एक ऐसी जीवंत सांस्कृतिक एवं आर्थिक व्यवस्था का केंद्र है. जहां प्रत्येक त्योहार सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है. वर्ष भर मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार वास्तव में सनातन अर्थव्यवस्था के सशक्त स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो करोड़ों लोगों के लिए रोजगार, व्यापार एवं आजीविका के अवसर सृजित कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं. भारत की सनातन परंपराओं से जुड़े त्योहार केवल धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक नहीं हैं. बल्कि वे किसानों, कारीगरों, शिल्पकारों, लघु उद्योगों, महिला उद्यमियों, परिवहन क्षेत्र, सेवा क्षेत्र, थोक एवं खुदरा व्यापारियों की एक श्रृंखला हैं.
CAIT के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन ने कहा कि रक्षाबंधन आस्था, स्नेह, सामाजिक समरसता और आर्थिक समृद्धि का अद्भुत संगम है. यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को सशक्त बनाता है. उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है. रोजगार सृजित करता है. आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाता है. इस वर्ष छत्तीसगढ़ के बाजारों में दिखाई दी रौनक इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के उपभोक्ता स्वदेशी एवं स्थानीय उत्पादों को तेजी से अपना रहे हैं. यह प्रवृत्ति स्थानीय व्यापार, एमएसएमई, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को मजबूत करने के साथ-साथ ‘विकसित भारत’ के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है. दीपावली, होली, नवरात्र, गणेश उत्सव, दुर्गा पूजा, ईद, क्रिसमस, छठ पूजा और रक्षाबंधन जैसे पर्व प्रतिवर्ष विशाल आर्थिक गतिविधियों को जन्म देते हैं. जो राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं.
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के उत्पादों के मांग में तेजी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल अभियान को इस वर्ष रक्षाबंधन पर व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ. छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं ने भी स्वदेशी एवं स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दी. हस्तनिर्मित राखियों, पारंपरिक उपहारों, स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के उत्पादों की मांग में वृद्धि दर्ज की गई. इससे स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों और लघु उद्यमियों के लिए आय एवं रोजगार के अवसर बढ़े.








