भारत ने गुरुवार को गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। केंद्र ने यह कदम घरेलू बाजार में कीमतें थामने के लिए उठाया है। हालांकि, इस फैसले से दुनियाभर के देशों में चावल की कीमतें बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया। अब अमेरिका और कनाडा में रहने वाले भारतवंशियों ने चावल की बोरियां इकट्ठी करनी शुरू कर दी हैं और यहां चावल को खरीदने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं।
भारत दुनियाभर में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। लिहाजा इसके किसी भी फैसले से अनाज की कीमतों में भारी असर पड़ने की आशंका रहती है। इस सबके बीच जानना जरूरी है कि आखिर भारत ने गैर-बासमती चावल को लेकर क्या फैसला लिया है? सरकार ने यह पाबंदी क्यों लगाई? भारत किन देशों में यह चावल निर्यात करता है? इसका कोई असर हो रहा है? भारत के बाहर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है?

भारत ने गैर-बासमती चावल को लेकर क्या फैसला लिया?
गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात को लेकर विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना जारी की। इसके मुताबिक, गैर-बासमती सफेद चावल की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, कुछ शर्तों के साथ निर्यात की अनुमति होगी। अधिसूचना से पहले जहाजों में जिस चावल की लोडिंग शुरू हो गई थी, तो उसके निर्यात की मंजूरी दी गई। साथ ही उन मामलों में भी निर्यात हो सकेगा, जहां सरकार ने दूसरे देशों को इसकी इजाजत दे रखी है। सरकार ने कुछ देशों की खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए उपरोक्त मंजूरी दी है। पिछले साल सितंबर में सरकार ने टूटे हुए चावल के निर्यात पर रोक लगा दी थी। साथ ही कई तरह के चावल के निर्यात पर 20 फीसदी ड्यूटी लगाई गई थी।
सरकार ने यह पाबंदी क्यों लगाई?
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार विधानसभा चुनावों और उसके बाद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले देश में अधिक महंगाई के जोखिम से बचना चाहती है। इसके अलावा खराब मौसम की वजह से प्रमुख उत्पादक राज्यों में चावल की बुवाई पर असर पड़ा है। इसलिए गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। आने वाले त्योहारी सीजन में चावल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
14 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ की बुवाई दो फीसदी कम हुई है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश की वजह से फसल की कम बुवाई हुई है। सरकार के फैसले से 80 फीसदी चावल का निर्यात प्रभावित हो सकता है। इससे देश में तो चावल की कीमत में गिरावट आएगी, लेकिन दुनियाभर में चावल की कीमतें बढ़ सकती है।
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। वहीं देश से निर्यात होने वाले कुल चावल में गैर-बासमती सफेद चावल की हिस्सेदारी लगभग 25 फीसदी है। जानकारी के मुताबिक, भारत से गैर-बासमती सफेद चावल का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2022-23 में 42 लाख डॉलर के करीब था। इससे पिछले साल में निर्यात 26.2 लाख डॉलर बताया गया था। भारत प्रमुख रूप से थाईलैंड, इटली, स्पेन, श्रीलंका और अमेरिका को गैर-बासमती चावल निर्यात करता है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कुल करीब 15.54 लाख टन सफेद चावल का निर्यात हुआ था। एक साल पहले समान अवधि में 11.55 लाख टन की तुलना में इसमें 35% की तेजी आई है। घरेलू बाजार में चावल की खुदरा कीमतें एक साल में 11.5% व एक माह में 3% तक बढ़ गई हैं। 2022-23 में इस चावल के निर्यात का मूल्य 42 लाख डॉलर था। उसके पहले के साल में 26.2 लाख डॉलर था।
इसका कोई असर हो रहा है?
गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध से देश में उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम होंगी। गैर-बासमती चावल (उसना चावल) और बासमती चावल की निर्यात नीति में कोई बदलाव नहीं करने को लेकर कहा गया कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाभकारी कीमतों का लाभ मिलता रहेगा। हालांकि, इस चावल की खेप को कुछ शर्तों के तहत निर्यात करने की अनुमति दी जाएगी।
सरकार के इस फैसले का कुछ हद तक असर भी देखने को मिल रहा है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई से 24 जुलाई के बीच कई शहरों में एक किलो चावल की कीमतों में एक से लेकर पांच रुपये तक की कमी आई है। सबसे ज्यादा कौशांबी, चामराजनगर और अरियालुर में पांच रुपये/किलो दाम कम हुए हैं। इसके बाद बीदर, यादगीर और हरिद्वार में लोग पहले से तीन रुपये सस्ता चावल खरीद रहे हैं। अररिया, मधेपुरा, धनबाद, रामपुर, सीवान, अमृतसर, गिरिडीह, भिंड, सीधी, शहडोल, चित्रकूट और बक्सर में ये कीमतें प्रति किलो दो रूपये घट गई हैं।
