

कोरोनावायरस का नया वैरिएंट दुनियाभर में स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाता हुआ देखा जा रहा है। अध्ययनों में पाया गया है कि नया वैरिएंट JN.1 अधिक संक्रामकता वाला है, लिहाजा कई देशों में पिछले दिनों मरीजों की संख्या में तेज उछाल दर्ज किया गया है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंगापुर में कोरोना पीक पर पहुंच गया है, इसके अलावा अमेरिका में विशेषज्ञों ने संक्रमण की एक और संभावित लहर को लेकर लोगों को सावधान किया है। कई अन्य देशों में भी दैनिक संक्रमण के मामले पिछले एक साल के रिकॉर्ड को तोड़ रहे हैं।
दिसंबर 2019 से शुरू हुई कोरोना महामारी के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि करीब चार साल में ये वायरस 701,157,669 लोगों को संक्रमित कर चुका है। संक्रमण के शिकार 6,964,862 लोगों की इससे मौत हुई है, वहीं 672,250,203 लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के बढ़ते मामले नए वैरिएंट को लेकर भी जोखिम बढ़ा रहे हैं, ऐसे में इसके प्रसार को रोकने के लिए सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। भले ही नया वैरिएंट JN.1 लोगों में गंभीर रोगों का कारक नहीं है पर किसी आबादी में इसके कारण तेज गति से संक्रमण बढ़ने का खतरा हो सकता है।
भारत में कैसे हैं हालात?

भारत में कोरोना की स्थिति की बात करें तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 774 नए मामलों की पुष्टि की गई है, देश में कोरोना के एक्टिव केस अब 4,187 हो गए हैं। मंत्रालय द्वारा सुबह 8 बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे की अवधि में दो मौतें (तमिलनाडु और गुजरात से एक-एक) भी हुई हैं।
गौरतलब है कि 5 दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या दोहरे अंकों में थी, लेकिन ठंड के मौसम की स्थिति और नए कोरोना सब-वैरिएंट जेएन.1 के कारण यह फिर से बढ़ना शुरू हो गया। कर्नाटक और केरल दो राज्यों में संक्रमण के सबसे अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
