


कोंडागांव। एक बार फिर कोंडागांव जिला मुख्यालय में अनदेखी देखने को मिली,जहां गंदगी के चलते आज करोड़ों रुपए लगाए गए सौंदर्यीकरण पर सिर्फ नाम का रह गया है।जी है हम बात कर रहे कोंडागांव के राम मंदिर तालाब की,जिसके सौंदर्यीकरण के लिए पूर्व सरकार ने करोड़ों रुपए इसके साज सज्जा पर खर्च कर दिए ।आपको बता दे की नेशनल हाइवे 30 जो कोंडागांव मुख्यालय से गुजरती है। साथ ही यह तालाब मरारपारा के 21 नंबर वार्ड में आता है। साथ ही तालाब के बाजू में ही राम मंदिर भी मौजूद है,जहां मंदिर में चढ़ने वाली सामाग्री को इसी तालाब में विसर्जन किया जाता है। तालाब के आसपास में रहने वाले लोगों द्वारा भी कचरे इसी तालाब में डाल कर तालाब को दूषित किया जा रहा है। मगर अब तक न तो इस मोहल्ले के पार्षद ने तो अनदेखी की ही साथ ही जिम्मेदार कहे जाने वाले मत्स्य विभाग व नगर पालिका परिषद की भी सुस्ती साफ नजर आ रही है ।
नगर पालिका परिषद व मत्स्य विभाग की जुगलबंदी
जिस विभाग को समय समय पर अपना कर्तव्य निभाना चाहिए, शायद मतस्य विभाग भी आज कुम्भकर्णी नींद में है और जिस नगर पालिका परिषद को सफाई में अवार्ड मिल रहा शायद वो भी आज साथ मे बैठ जुगलबंदी कर रहे है जिसके चलते आज सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई है। साथ ही ये दोनों विभागों को जानकारी देने वाला ही अगर आंख बंद कर ले तो कैसे मिलेगी जानकारियां।
घर के कचरे का बना ताल
शास्त्रों अनुसार कहा जाता है कि रुके हुए जल में किसी धार्मिक चीजों का विसर्जन नहीं किया जाता। मगर कोंडागांव के राम मंदिर तालाब में आप देख सकते हो रोज पूजा करने वालों के ही द्वारा घर पर रखे हुए हफ्ते भर से ज्यादा के चढ़े हुए पुष्प व फल को रुके हुए जल में विसर्जन किया जा रहा है, जिसे किसी नदी में विसर्जन करना होता है,जिसके चलते तालाब पूरी तरह से दूषित हो चुका है। आप फ़ोटो व वीडियो के माध्यम से देख सकते हो कि दूषित जल की वजह से किस तरह जल में रहने वाली जीव किस तरह तड़प के मरी इसका अंदाजा लगाया जा सकता हैं ।
अवार्ड तो लिया पर कितनी वास्तविकता
या यू कहे विभाग ने मार दिए सैकड़ो मछलियां क्यों कि स्वच्छता को ले कर विभाग ने तो अवॉर्ड तो लिया मगर शायद अवॉर्ड लेने के पश्चात भूल गया कि वार्डों में फैली है गंदगी नही होते नाली साफ़। खबरों के बाद शायद पार्षद व जिम्मेदार विभाग की आँख खुल जाए पिछले खबर में हमने मरारपारा वार्ड की नालियों में गन्दगी से आप को रूबरू कराया था अब देखने वाली बात है प्रशासन इस ख़बर को क्या महत्व देता है।
