लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आने के बाद, एक बार फिर सत्ता हासिल करने के लिए क्षेत्रीय पार्टियां अहम हो गई है, भारतीय जनता पार्टी को सरकार में इन्हीं पार्टियों पर निर्भर रहना होगा।
चुनावी राजनीति में प्रवेश करने के बाद करीय वाई दशक से बहुमत की सरकार की कमान संभालने वाले श्री नरेन्द्र मोदी बाऔर प्रधानमंत्री अपने दीसरे कार्यकाल में गठबंधन सरकार का नेतृला कारेंगे। इस बार लगभग 14 सहयोगी दलों के साथ तालमेल कर सरकार चलानी होगी, जिसका असर भारतीय जनता पार्टी के बड़े एजेंडों जैसे मो.सी, एक राष्ट्र एक चुनाव, परिश्रीमन आदि पर पड़ सकता है।

दरअसल भारत जैसे विविधता वार्त देश में आन राज्यों की अलग-अलग समस्याएं और जरूरते हैं। उनकी अलग-अलग संस्कृति-भाषायी कुनवक्ट है, ऐसे में स्थानीय मुद्दों को उठाने वाली पार्टी अहम हो जाती है। क्षेत्रीय पार्टियों की केन्द्र में भूमिका हमेशा ही बहस का मुड्दा रही है कुछ लोग यह मानते हैं कि यह ताका पर लगाम लगाने के लिए लोकतंत्र में आवश्यक है तो कुछ लोगों का मानना है कि इसके कारण वड़े फैसले लेने में देरी होती है। सौर सच्चाई 35 साल अर्थात 1999 से लगातार नहबंधन की सरकारे ही बन रही है. भले ही 2014 और 2019 में भारतीय जनता पार्टी को इसकी दरकार ही पर क्या आन 2024 में गड़बंधन मजबूरी बन गया हैसरकार को मजबूती प्रदान करेगा) यह तो आने बाल वक्त ही बतायेगा। करत में केन्द्र में पाली बार गठबंधन की सरकार मार्च 1977 में बनीं जो जून 1979 तक कुल 857 दिनों एक चलों यह पहली गैर बीं। भारत में अपना कार्यकाल पूर्ण करने कली गठबंधन की सरकार वर्ष 1999 से वर्ष 2004 अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में बनी थी। भारतीय लोकतंत्र संक्रमण के दौर से गुजर रहा है जहां जमीनी सच्चाई देश को गठबंधन की राजनैति की ओर उकेल रही हैं। संसदीय लोकतंत्र में सरकार का गठन, संचालन, सहयोगियों की संख्या एवं राजनीतिक निपुणता आदि कहाकों पर निर्भर करता है। गठबंधन की राजनीति परिस्थितियों के गर्भ से उत्पन्न होती है। संसदीय शासन प्रणाली में उन राजनैतिक दलको सरकार के गठन का अधिकार मिला है जिसे विधाविका के निचाहे सदन में अधिकतम सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो।
बेशक राजनीतिक गठबंधन सत्ता सुख को सुलभ कराते हैं लेकिन इसमें शामिल दलों की बार-बार दोस्ती, गठबंधन सरकार सरकार का एक ऐसा स्वरूप हैं। इसमें विभिन्न राजनीतिक दल सरकार बनाने के लिए सहयोग करते हैं। ऐसी व्यवस्था का का सामान्य कारण चुनाव के बाद किसी भी भी दल को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं होना होता है। गठबंधन एक लैटिन भाषा के शब्द ‘कोलिटिया’ से बना है जिसका अर्थ होता है ‘एक साथ बढ़ना’। सामान्यतः यह माना जाता है कि गठबंधन की सरकार का मंत्री मंडल दिशाहीन और मूल्यविहीन राजनीति को बढ़ावा देता है। लोकतंत्र की सफलता के लिए यह सदैव ही आवश्यक है कि राजनीतिक दलों में सहनशीलता और कर्तव्य परायणता का भाव हो।
धोखाषाढ़ी और सौदेबाजी आज राजनीतिक गठबंधन की सच्चाई बन गई है, परन्तु गाए वर्षों में भारत की राजनीति में जो नया मोड़ आषा है उससे गठबंधन की सरकार की नकारा भी नहीं जा सकता। हमें अपने देश की राजनेतिक तथा सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुख्य मार्ग खोजना होगा। भारतीय संविधान के जानकात एवं राजनीतिक विज्ञान तथा राजनीतिक दालों के नेताओं के चीच मिली-जुली सरकार के गढ़न और उसके कार्य करने की प्रक्रिया पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है तथा यह भी आवश्यक है कि राजका अस्थिरता की कैसे निर्वाचित किया जाए जिससे व्यक्तिगत हितों को त्याग कर सामाजिक तथा राष्ट्रहित के विषयों को अधिक महत्व दिया जा सके एवं भ्रष्टाचार को निर्धारित किया जाए। वर्तमान सरकार के लिए यह कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा।
डॉ. भूपेन्द्र करवन्द्र, प्राध्यापक (विधि)
