78वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के नाम संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने अपने संबोधन में किसानों के योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि हमारे अन्नदाताओं ने देशवासियों को भोजन उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति में किसानों-श्रमिकों की अहम भूमिका रही है. उन्होंने कहा कि गरीबों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराने में पीएम गरीब कल्याण योजना का बड़ा योगदान है. योजना के जरिए 80 करोड़ से अधिक गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 15 अगस्त के दिन देश-विदेश में सभी भारतीय, ध्वजारोहण समारोह में भाग लेते हैं, देशभक्ति के गीत गाते हैं और मिठाइयां बांटते हैं. बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं. जब हम बच्चों को अपने महान राष्ट्र तथा भारतीय होने के गौरव के बारे में बातें करते हुए सुनते हैं तो उनके उद्गारों में हमें महान स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं की प्रतिध्वनि सुनाई देती है. हमें यह अनुभव होता है कि हम उस परंपरा का हिस्सा हैं जो स्वाधीनता सेनानियों के सपनों और उन भावी पीढ़ियों की आकांक्षाओं को एक कड़ी में पिरोती है जो आने वाले वर्षों में हमारे राष्ट्र को अपना सम्पूर्ण गौरव पुनः प्राप्त करते हुए देखेंगी.
देश का पेट भरने में किसानों का अमूल्य योगदान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारे अन्नदाता किसानों ने उम्मीदों से बेहतर कृषि उत्पादन सुनिश्चित किया है. ऐसा करके उन्होंने भारत को कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भर बनाने और हमारे देशवासियों को भोजन उपलब्ध कराने में अमूल्य योगदान दिया है.
पीएम गरीब कल्याण योजना गरीबों को मुफ्त राशन दे रही
देश के नाम संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि राष्ट्र संपूर्ण गौरव प्राप्त करेगा. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है. हमारा उद्देश्य गरीबी से बाहर आए लोगों को फिर से नीचे नहीं जाने देना है. उन्होंने कहा कि पीएम गरीब कल्याण योजना के जरिए 80 करोड़ से अधिक गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है.
देश के आर्थिक विकास में किसानों-श्रमिकों की अहम भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2021 से वर्ष 2024 के बीच 8 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर हासिल करके भारत सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में शामिल है. इससे न केवल देशवासियों के हाथों में अधिक पैसा आया है, बल्कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में भी भारी कमी आई है. यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, और हम शीघ्र ही विश्व की तीन शीर्षस्थ अर्थ-व्यवस्थाओं में स्थान प्राप्त करने के लिए तैयार हैं. यह सफलता किसानों और श्रमिकों की अथक मेहनत, नीति-निर्माताओं और उद्यमियों की दूरगामी सोच तथा देश के दूरदर्शी नेतृत्व के बल पर ही संभव हो सकी है.
कलह को बढ़ावा देने वाली प्रवृत्तियों को खारिज करना होगा
समावेशी भावना, हमारे सामाजिक जीवन के हर पहलू में दिखाई देती है. अपनी विविधताओं और बहुलताओं के साथ, हम एक राष्ट्र के रूप में, एकजुट होकर, एक साथ, आगे बढ़ रहे हैं. समावेश के साधन के रूप में, affirmative action को मजबूत किया जाना चाहिए. मैं दृढ़ता के साथ यह मानती हूं कि भारत जैसे विशाल देश में कथित सामाजिक स्तरों के आधार पर कलह को बढ़ावा देने वाली प्रवृत्तियों को खारिज करना होगा.
