उज्जैन में भगवान शिव के अनेक पुराण प्रसिद्ध मंदिर हैं। इन्हीं में से एक विष्णु सागर के तट पर भगवान मार्कण्डेश्वर महादेव का मंदिर भी है। यहां महादेव ने यमराज को बांध रखा है। मान्यता है इनके दर्शन से भक्त की आयु बढ़ती है, साथ ही संपन्नता का आशीर्वाद भी मिलता है। इसी मान्यता के चलते भक्त यहां जन्मदिन व विवाह की वर्षगांठ पर आयु आरोग्यता की प्राप्ति के लिए भगवान मार्कण्डेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने आते हैं।
शिवलिंग दक्षिण दिशा की ओर
मंदिर के पुजारी ब्रह्मऋषि जय गुरुजी ने बताया मार्कण्डेश्वर ऋषि ने यहां काल को परास्त कर मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी और चिरंजिवि हुए थे। इस मंदिर में काल अर्थात यमराज बंधन में बंधे हुए हैं। मंदिर में विराजित सिद्ध शिवलिंग दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए है। शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से एक आंख भी उत्कीर्ण है। दक्षिण काल की दिशा है। मान्यता है भक्तों की रक्षा के लिए महाकाल काल को देख रहे हैं। मार्कण्डेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने से भक्तों को आयु आरोग्य की प्राप्ति होती है।
पदम पुराण में मिलता है उल्लेख
पदम पुराण के उत्तराखंड में मार्कण्डेय के चिरंजीवी होने की कथा मिलती है। कथा के अनुसार ऋषि मृकंड मुनी ने पुत्र प्राप्ति के लिए अपनी पत्नी के साथ घोर तपस्या करते हुए भगवान शिव को प्रसन्न किया। भगवान शिव ने ऋषि से पूछा तुम्हे गुणहीन दीर्घायु पुत्र चाहिए या गुणवान अल्प आयु। इस पर ऋषि ने गुणवान पुत्र का वरदान मांगा शिव तथास्तु कहकर अंर्तध्यान हो गए और ऋषि को मार्कण्डेय पुत्र रूप में प्राप्त हुए। जब मार्कण्डेय 16 वर्ष के हुए तो, पिता मृकंड उनकी आयु को लेकर चिंतित रहने लगे। एक दिन पुत्र के निवेदन पर सारा वृतांत सुनाया। इसके बाद मार्कण्डेय आयु प्राप्त करने तथा चिरंजीवी होने की कामना से यहां शिव की घोर तपस्या करने लगे। अंत समय आने पर यमराज उनके प्राण हरने आए, तब मार्कण्डेय महामृत्युंजय का स्तवन करने लगे और शिवलिंग से लिपट गए। भक्त को संकट में देख शिव प्रकट हुए और उन्होंने काल को यहीं बांध दिया तथा मार्कण्डेय का चिरंजीवी होने का वरदान दिया।
शिवनवरात्र के नौ दिन रात 3 बजे खुलेंगे मंदिर के पट
मार्कण्डेश्वर महादेव मंदिर में शुक्रवार से शिवनवरात्र उत्सव की शुरुआत होगी। गुरुवार- शुक्रवार की दरमियानी रात तीन बजे मंदिर के पट खुलेंगे। कर्पूर आरती के बाद भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन होगा। मंगला आरती के बाद भक्त दिनभर भगवान का अभिषेक पूजन कर सकेंगे। शाम 4 बजे से पुन: भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन होगा तथा नौ दिन तक भगवान का अलग-अलग श्रृंगार किया जाएगा। पूजा अर्चना का यह विशेष क्रम पूरे नौ दिन चलेगा।








