
सरगुजा : अंबिकापुर नगर निगम की 480 महिलाओं ने एकजुट होकर अपनी किस्मत खुद लिखी है.इन्होंने वो काम किया है जो हर किसी के लिए आसान नहीं है. हम जिन चीजों को कचरा समझकर फेंकते हैं,इन महिलाओं ने इसी कचरे से सोना निकाला है.जिसके बूते आज ये महिलाएं आत्मनिर्भर हैं. इन्होंने अपनी मेहनत से अपने जैसे काम करने वाली दूसरी महिलाओं के जीवन में भी उजाला लाया है. आईए मिलते हैं कचरा से सोना पैदा करने वाली महिलाओं से.
स्वच्छता दीदियों ने की कड़ी मेहनत: अम्बिकापुर को स्वच्छता के क्षेत्र में पहचान दिलाने में यहां की स्वच्छता दीदियों की मेहनत किसी से छिपी नहीं है. शहर को स्वच्छ रखने के लिए स्वच्छता दीदियों की टीम कड़ी मेहनत करती है.यही वजह है कि इनके काम की तारीफ सिर्फ प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश विदेश में भी हुई है. इन दिनों फिर स्वच्छता दीदियों ने नया नवाचार करके हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है.इस बार स्वच्छता दीदियों ने कचरे से कमाई की है.जिसके बूते हर महीने 10 से 12 हजार की आमदनी हर एक को हो रही है.
महिलाओं ने कचरा से निकाला सोना
10 साल की मेहनत लाई रंग : अब यदि आपको धरती की कोख से सोना निकालना हो तो उसके लिए जी तोड़ मेहनत करनी होगी.लेकिन इन स्वच्छता दीदियों ने धरती की कोख के बजाय शहर के कचरे से सोना निकाला.दरअसल स्वच्छता दीदियों ने शहर से निकलने वाले कचरे को रीसाइकिल करके दैनिक जीवन में इस्तेमाल करने लायक जरुरी सामान बनाए हैं. 2014 में जब ये काम शुरू किया गया तो एक महिला को सिर्फ 2 हजार रुपये मिलते थे. कई तरह के स्वरोजगार कचरे से किए गए और अब एक और नई पहल की गई है. जिससे इनकी आमदनी में और अधिक इजाफा होगा, ये महिलाएं अब सीएण्डडी वेस्ट यानी की बिल्डिंग के मलबे से पेवर ब्लॉक बना रही हैं.
शुरू में 2 हजार रुपये ही हर महिला को मिलता था, लेकिन अब 11 हजार मिल रहा है. हर महिला अब आत्मनिर्भर बन चुकी है, पहले काम के लिये भटकना पड़ता था, इसमें कई विधवा परित्यक्ता हैं. जो इस कमाई से अपना जीवन निर्वाह कर पा रही हैं- अगस्तीना कुजूर, सदस्य,सिटी लेबल फेडरेशन
वेस्ट से बना रहीं पेवर ब्लॉक : अम्बिकापुर के पुराना बस स्टैंड में पास नगर निगम के डीपो में सीएन्डडी वेस्ट को एग्रीगेट करके बेचने का काम शुरू किया गया था. इससे तो आमदनी हो ही रही थी अब इसी जगह महिलाओं ने पेवर ब्लॉक बनाने की मशीन लगा ली है.एक पेवर ब्लॉक 22 रुपये में बेच रही हैं. जबकि बाजार में इसकी कीमत 25 रुपए है. इस काम के लिए महिलाओं को अलग से बाजार भी नही खोजना होगा, क्योंकि नगर निगम के ठेकेदार ही इनसे पेवर ब्लॉक खरीद लेंगे.
480 महिलाओं का बदला जीवन : अम्बिकापुर में कचरे को अलग-अलग करके उसे बेचकर पैसे कमाए जाते हैं. प्लास्टिक वेस्ट से दाना बनाया जाता है, गीले कचरे से खाद्य बनाई जाती है. गोबर से गो कास्ट बनाया जाता है. सीएण्डडी वेस्ट को अलग-अलग कर गिट्टी और रेत बेची जाती है. शहर में 480 महिलाओं का 37 समूह मिलकर ये काम करता है.इन सबको मिलाकर एक सिटी लेबल फेडरेशन बनाया गया है जिसके अधीन से सभी समूह काम करते हैं.
हर महीने 27 लाख की आमदनी : अंबिकापुर नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार इस फेडरेशन से हर महीने करीब 16 लाख की आमदनी यूजर चार्ज से और करीब 11 लाख की आमदनी कचरे को बेचकर होती है. लेकिन पेवर ब्लाक के निर्माण से अब ये कमाई और अधिक बढ़ जाएगी. शासन के मापदंड में हर महिला को 8 हजार का मानदेय मिलता है, लेकिन अम्बिकापुर नगर निगम की महिलाओं के अधिक मुनाफे की वजह से इन्हें अतिरिक्त 3 हजार का बोनस भी मिलता है, जिस कारण अम्बिकापुर की स्वच्छता दीदियों का मानदेय 8 नही बल्कि 11 हजार रुपए होता है.
