रायपुर। कांग्रेस के 85वेें राष्ट्रीय अधिवेशन मेें देशभर से आए 15 हजार से अधिक प्रतिनिधियों के सामने पार्टी ने आर्थिक और विदेश नीति के प्रस्ताव के माध्यम से चुनावी खाका पेश किया। कांग्रेस ने साफ कर दिया कि मंदिर-मस्जिद से रोजगार नहीं मिलेगा। चुनाव मेें सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी होगी। पार्टी देश की कमजोर हो रही सीमाओें और पड़ोसी देशोें से कमजोर हो रहे राजनयिक संबंध को चुनावी मुद्दा बनाएगी। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने आर्थिक प्रस्ताव पेश करते हुए दो टूक कहा कि बेरोजगारी, संस्कृति की रक्षा और संविधान की रक्षा पार्टी का प्रमुख एजेेंडा है।भाजपा के मंदिर मुद्दे पर निशाना साधते हुए कमलनाथ ने कहा कि मंदिर-मस्जिद जाने से रोजगार के नए अवसर नहीं बनेेंगे। कांग्रेस के चुनावी एजेेंड.े मेें राहुल गांधी की पदयात्रा की भी साफ झलक दिख रही है। अधिवेशन मेें पेश तीनोें प्रस्ताव राजनीति, आर्थिक और विदेश नीति मेें भारत जोड़ो यात्रा मेें मिले फीडबैक को शामिल किया गया है।

आर्थिक प्रस्ताव पेश करते हुए कमलनाथ ने कहा कि हम दिल जोड़ते हैैं, संबंध जोड़ते हंै और संस्कृति को जोड़ते हैैं। आज संस्कृति खतरे मेें हैैं। कांग्रेस को संस्कृति और संविधान का रक्षक बनाना होगा, तभी बेरोजगारी का सामना कर सकते हैैं। संविधान गलत हाथोें मेें चला जाता है तो देश की संस्कृति खराब हो जाती है। कांग्रेस दिल की बात करती है, रोजगार की बात करती है।
आर्थिक प्रस्ताव के समर्थन मेें सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि देश की एक से दस तक प्राथमिकता रोजगार और महंगाई होना चाहिए। श्रीनेत ने कहा कि देश गरीबी, भुखमरी और अदाण्ाी स्कैम से जूझ रहा है और केंद्र सरकार मौन है। भारत जोड़ो यात्रा मेें राहुल गांधी युवाओें के टूटे सपनोें को देख रहे थे। आर्थिक प्रस्ताव मेें उन टूटे सपनोें को जोड़ने का काम किया गया है। देश की सरकार लोगों की आकांक्षाओं की जिस तरह उपेक्षा कर रही है, भारत जोड़ो यात्रा उसके खिलाफ एक आंदोलन थी। सत्ता के राजनीतिक केंद्रीकरण ने संघीय ढांचे को ध्वस्त कर दिया है।
आर्थिक प्रस्ताव मेें ग्रीन एनर्जी और नवाचार
कांग्रेस की आर्थिक नीति मेें नौकरी, नवाचार और ग्रीन एनर्जी पर मुख्य फोकस है। कांग्रेस ने माना है कि उद्योग और सेवाएं मुख्य रूप से निजी क्षेत्र के निवेश और जोखिम उठाने से संचालित होंगी। हमें आकांक्षा, नवाचार, रचनात्मकता और उद्यमशीलता के गुणों को स्पष्ट रूप से अपनाना चाहिए। प्रस्ताव मेें एमएसएमई सेक्टर मेें रोजगार, स्टार्टअप को बढ़ावा, आर्थिक असमानता को दूर करने के उपाय और नई पीढ़ी के लिए विनिर्माण, सेवाओं, कृषि-उद्योगों, सूर्योदय उद्योग और नई प्रौद्योगिकी व्यवसायों में भी नियमित नौकरियों की बात कही गई है।
आर्थिक प्रस्ताव मेें खास
-स्कूली शिक्षा के 10 और 12 वर्ष पूरे करने वाले बच्चों को शिक्षा भत्ता।
-कमजोर समुदायों के छात्रों को मुफ्त टैबलेट और इंटरनेट कनेक्शन। शिक्षकों के प्रशिक्षण में निवेश।
-उन महिला गृहणियों को भत्ता जो दिन में कई घंटे बिना पारिश्रमिक के काम करती हैं।
-सरकारी नौकरी के आवेदन और नौकरी की परीक्षाओं के लिए फीस की पूरी छूट।
-घरेलू कामगारों और प्रवासी श्रमिकों के रोजगार को विनियमित करने के लिए कानून।
-स्वरोजगार सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और बीमा।
-कामकाजी महिलाओं और स्वरोजगार करने वाली महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता।
-किसानों को किराए पर कृषि उपकरण और मशीनरी और पोस्टपेड गुणवत्ता वाले बीज।
-एसटी, एससी, अल्पसंख्यकों और महिलाओं द्वारा शुरू उद्यमों को संस्थागत वित्त प्रदान करना।
नए औद्योगिक और श्रम नीति ढांचे की जरूरत पर बल
प्रस्ताव मेें अदाण्ाी समूह का सबसे ज्यादा जिक्र है। इसमेें कहा गया है कि संदिग्ध साख वाले एक समूह का टैक्स हैवन से संचालित अपनी कंपनियों और तरह-तरह के हथकंडों का इस्तेमाल करके देश की महत्वपूर्ण संपत्तियों पर एकाधिकार हो गया है। सरकारी एजेंसियां या तो कार्रवाई नहीं कर रही हैं या इस समूह को सुविधा प्रदान कर रही हैं। हम ऐसे व्यक्ति के खिलाफ नहीं, जो एक साधारण जगह से उठकर दुनिया का दूसरा सबसे अमीर व्यक्ति बन जाए। हम सरकारी सुविधा वाले निजी एकाधिकार के खिलाफ हैं। अर्थव्यवस्था के दोहरे हमले यानी बढ़ती बेरोजगारी और असमानता की पृष्ठभूमि में अपने आर्थिक विकास रोडमैप का पुनर्मूल्यांकन और पुनर्प्राथमिकता दें। इन्हें हासिल करने के लिए एक नए औद्योगिक, व्यापार, पूंजी और श्रम नीति ढांचे की जरूरत है।