दुनिया के काफी युवा चाहकर भी पार्टनर नहीं खोज पा रहे हैं. इसकी वजह से अमीर देशों में अकेलापन बढ़ता जा रहा है. 25 से 39 साल वाला हर चौथा युवा सिंगल है. पश्चिमी यूरोप और अमेरिका जैसे अमीर देशों में यूथ अपने भविष्य को लेकर चिंतित है. कोस्टा रिका के युवा सबसे ज्यादा टेंशन में हैं. जबकि पनामा-कैमरून के युवा सबसे ज्यादा पॉजिटिव रहते हैं. इस तरह की तमाम जानकारियों के साथ संयुक्त राष्ट्र (UN) ने अपनी नई वैश्विक रिपोर्ट जारी की है. इसमें विभिन्न मुद्दों पर युवाओं के नजरिए को दुनिया के सामने रखा गया है.

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की Lives, Choices and Futures नाम से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 25 साल की उम्र पार करते ही युवा गंभीर हो जा रहे हैं. वे सोशल मीडिया पर रील्स देखने और इन्फ्लुएंसर्स को फॉलो करने की बजाय इसका इस्तेमाल करियर और अपने अन्य जरूरी कामों के लिए करने लगते हैं. सर्वे के अनुसार दुनियाभर के युवा पार्टनर चाहते हैं, माता-पिता बनने की इच्छा भी रखते हैं, लेकिन काफी युवाओं को इसमें सफलता नहीं मिल पा रही है.
यूएन की रिपोर्ट में एक लाख से अधिक युवाओं में से करीब 16% ने बताया कि वे अकेले रहने को प्राथमिकता देते हैं. इनमें से करीब एक चौथाई यानी 25% अकेले ही हैं. वहीं कुछ ऐसे भी यूथ हैं जो अपने लिए पार्टनर चाहते हैं. इसके बावजूद उनकी तलाश खत्म नहीं हो रही है. अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पश्चिमी यूरोप के युवा सही और वफादार पार्टरन न मिल पाने से परेशान हैं. मौजूदा दौर के युवा किसी पारिवारिक और सामाजिक दबाव में नहीं आना चाहते हैं. वे रिश्तों को अहमियत देते हैं लेकिन व्यक्तिगत खुशी भी चाहते हैं.
पूर्वी यूरोप के पुरुष व अफ्रीका की महिलाएं सबसे ज्यादा सिंगल : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार कुछ देशों में सिंगल रहने वाले पुरुषों की संख्या ज्यादा है, जबकि कुछ देशों में अकेली रहने वाली महिलाओं की संख्या अधिक है. वेस्ट एंड सेंट्रल अफ्रीका के 32.3% जबकि पूर्वी यूरोप व सेंट्रल एशिया के 31.7% पुरुष सिंगल हैं. वे चाहकर भी पार्टनर नहीं खोज पा रहे हैं. वहीं वेस्ट एंड सेंट्रल अफ्रीका में करीब 25.3% महिलाएं सिंगल हैं. वहीं वैश्विक स्तर पर करीब 30% पुरुष सिंगल हैं. महिलाओं में यह संख्या 19.3% है. दुनिया में सिंगल पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है.
लिव इन में रहने वाले कुछ युवा पार्टनर से नहीं करना चाहते शादी.
लिव इन में रहने वाले कुछ युवा पार्टनर से नहीं करना चाहते शादी. (Photo Credit; Getty)
सिंगल रहने के पीछे के क्या हैं प्रमुख कारण? : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में युवाओं के अकेले रहने या किसी रिश्ते में न बंध पाने का कारण भी बताया गया है. आर्थिक तंगी, रहने के लिए अच्छा घर न होना सिंगल रहने की सबसे बड़ी वजह है. दूसरा कारण ये है कि काफी युवाओं को उनका मनपसंद साथी नहीं मिल पाता है. इससे वे किसी रिश्ते में बंधने से परहेज करते हैं. सर्वे में शामिल करीब 50.6% युवा पार्टनरशिप न हो पाने के लिए इसी को बड़ी वजह मानते हैं. इसके अलावा 41.6% युवा स्वास्थ्य दिक्कतों और पहले के ऐसे रिश्ते में मिले धोखे के कारण भी शादी से बचते हैं.
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अरब और खाड़ी देश में पारंपरिक शादी का चलन ज्यादा : रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कई देशों में अभी भी पारंपरिक शादी का चलन सबसे ज्यादा है. यानी वे बिना साथ वक्त बिताए, बिना लिव इन में रहे शादी को प्राथमिकता देते हैं. अरब और खाड़ी देशों में यह ट्रेंड काफी ज्यादा है. यहां रहने वाले करीब 65.7% युवा सीधे शादी करने के पक्ष में रहते हैं. इन देशों में अकेले रहने की दर बहुत कम है. सिंगल युवाओं की संख्या यहां करीब 3.5% ही है. वहीं करीब 8.6% युवा ऐसे हैं जो लिव इन में रहना तो चाहते हैं, लेकिन पार्टनर से शादी नहीं करना चाहते हैं.
अमीर देशों में लिव इन को ज्यादा मंजूरी : रिपोर्ट बताती है कि पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसे अमीर देशों में लिव इन का चलन बढ़ा है. यहां रहने वाले करीब 70% से भी अधिक लोग इस रिश्ते का समर्थन करते हैं. यहां लिव इन का कोई विरोध नहीं है. वहीं अरब और खाड़ी देशों में 70% से अधिक लोग इसके विरोध में रहते हैं. हालांकि दुनिया के कई देश लिव इन पर अलग-अलग राय रखते हैं. करीब 36% से 38% लोग इसके समर्थन में रहते हैं जबकि 34% से 36% लोग इसका विरोध जताते हैं. बाकी लोग इस पर कुछ नहीं कहना चाहते.
जिन महिलाओं के छोटे बच्चे, उनके फुल टाइम जॉब का विरोध : दुनिया के कई देशों में इस बात का विरोध है कि जिन महिलाओं के छोटे बच्चे हैं, उन्हें फुल टाइम नौकरी नहीं करनी चाहिए. जबकि पिता के ऐसा करने पर किसी को कोई दिक्कत नहीं रहती. वैश्विक औसत के अनुसार केवल 14.3% लोग ही चाहते हैं कि जिस महिला के छोटे बच्चे हों वह फुल टाइम जॉब करें. वहीं 26.5% लोगों को छोटे बच्चों वाले पिता के फुल टाइम काम करने पर कोई आपत्ति नहीं है. वहीं अरब और खाड़ी देशों में करीब 42% लोग नहीं चाहते हैं कि ऐसी कंडीशन वाली महिला फुल टाइम वाली नौकरी करे.
सोशल मीडिया का इस्तेमाल युवा अलग-अलग कारणों से करते हैं.
सोशल मीडिया का इस्तेमाल युवा अलग-अलग कारणों से करते हैं. (Photo Credit; Getty)
किन जगहों पर पार्टनर खोज रहे युवा? : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बताया गया है कि जो युवा सिंगल हैं वे अपने मनमाफिक पार्टनर की तलाश किन जगहों पर कर रहे हैं?. स्कूल, कॉलेज या कार्यस्थल पर पार्टनर तलाशने को युवा सबसे बेहतर स्थान मानते हैं. ऐसे युवाओं की संख्या 32.8% है. 31% युवा ऑनलाइन या डेटिंग ऐप्स पर जीवनसाथी की तलाश करते हैं. वहीं करीब 30% युवक-युवतियां दोस्तों समेत अन्य व्यक्तिगत नेटवर्क में पार्टनर की तलाश करते हैं. 24.2% युवा पार्टियों, क्लब, हॉबी क्लासेज, कैफे आदि जगहों पर पार्टनर तलाशते हैं. रिश्ते तलाशने के पुराने तरीकों पर अब युवा काफी कम भरोसा कर रहे हैं.
बिन बच्चों के रह रहे इन देशों के लोग : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि कई देशों के लोग बुनियादी जरूरतों के अभाव में बच्चे नहीं चाहते हैं, जबकि कई देशों के काफी युवा चाहकर भी ये ख्वाहिश पूरी नहीं कर पा रहे हैं. जापान, दक्षिण कोरिया, इटली, फिनलैंड, सिंगापुर, कनाडा, थाईलैंड, हंगरी, स्पेन, चेकिया, नॉर्वे, ट्यूनीशिया, पोलैंड, बोस्निया और हर्जेगोविना, पुर्तगाल, फ्रांस, एस्टोनिया, ब्राजील, इथियोपिया, स्वीडन, जर्मनी, कजाकिस्तान,ऑस्ट्रेलिया, चिली, सर्बिया, अर्जेंटीना, मोरक्को जैसे देशों में रहने वाले 35-39 साल के काफी युवा चाहत के बावजूद आर्थिक समेत कई वजहों से बिना बच्चों के हैं.
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अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया में बड़े परिवार का क्रेज नहीं : यूएन की रिपोर्ट बताती है कि वेस्ट एंड सेंट्रल अफ्रीका के लोग बड़े परिवार को महत्व देते हैं. वे चाहते है कि हर माता-पिता के कम से कम औसतन 3.5 से 4.3 बच्चे हों. वहीं दूसरी ओर पश्चिमी यूरोप, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई अमीर देशों में बड़े परिवार का क्रेज बहुत कम है. यहां सभी उम्र के युवा 1.9 से 2.2 बच्चे ही चाहते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि किसी भी देश के युवाओं की परिवार बढ़ाने की सोच को वहां का भौगोलिक इलाका भी काफी हद तक प्रभावित करता है.
जीवनसाथी से ज्यादा बच्चे चाहते हैं पुरुष : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बच्चों को लेकर महिलाओं और पुरुषों के दूसरे नजरिए को भी पेश किया गया है. इसमें बताया गया है कि कई देशों में पुरुष चाहते हैं कि उनका जीवनसाथी ज्यादा बच्चे पैदा करे जबकि महिलाएं कम बच्चे चाहती हैं. वैश्विक औसत के हिसाब से महिलाएं औसतन करीब 2.43 बच्चे चाहती हैं जबकि पुरुष इसकी तुलना में 2.62 बच्चे चाहते हैं. केवल वेस्ट एंड सेंट्रल अफ्रीका ही ऐसा देश है जहां महिलाएं 3.96 जबकि पुरुष 3.87 बच्चे चाहते हैं. जबकि अन्य देशों में महिलाएं कम बच्चों को प्राथमिकता दे रहीं हैं.
कुछ मुद्दों को लेकर ज्यादा टेंशन में रहते हैं कोस्टा रिका के लोग.
कुछ मुद्दों को लेकर ज्यादा टेंशन में रहते हैं कोस्टा रिका के लोग. (Photo Credit; Getty)
भारत में काफी सकारात्मकता, ट्यूनीशिया-बांग्लादेश में कम : रिपोर्ट के अनुसार भारत के 83% युवाओं की सोच सकारात्मक है. कोस्टा रिका के लोग जलवायु परिवर्तन, आर्थिक तंगी, युद्ध आदि से सबसे ज्यादा टेंशन में हैं. यहां सकारात्मकता की दर औसत है. इन्हीं समस्याओं से फिलीपींस के लोग भी परेशान हैं, लेकिन सकारात्मकता की दर यहां काफी अधिक है. ट्यूनीशिया, ब्राजील, बोत्सवाना और बांग्लादेश के लोग अपने भविष्य को लेकर कम सकारात्मक नजरिया रखते हैं. वहीं पनामा-कैमरून के युवा सबसे ज्यादा पॉजिटिव हैं.
स्टडी में किन-किन देशों को किया गया शामिल? : संयुक्त राष्ट्र ने स्टडी के लिए भारत समेत दुनिया के 73 देशों को शामिल किया. इन देशों में रहने वाले 18 से 39 साल के एक लाख 8 हजार 926 यूथ इसका हिस्सा बने. इनमें 55 हजार 626 महिलाएं जबकि 53 हजार 300 पुरुष थे. ये युवा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नॉर्वे, पोलैंड, स्पेन, स्वीडन, यूक्रेन, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, उरुग्वे, उज्बेकिस्तान, भारत, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, ब्राजील, कम्बोडिया, मिस्र, घाना, इंडोनेशिया, केन्या आदि देशों के रहने वाले थे.
