- बच्चे दूसरे भवन में शिफ्ट, प्राचार्य सस्पेंड
राज्य सरकार ने 65 लाख में बच्चों के लिए हाईस्कूल भवन बनवाया था। वहां बच्चों की कक्षाएं चल रही थीं। बिलासपुर जिले के बेलतरा में यह भवन अब खंडहर जैसा हो गया है। कारण यह है कि सरपंच का पति वहां के दरवाजे, खिड़की और टाइल्स उखाड़ कर अपने घर ले गया। बच्चों से कह दिया गया कि भवन की मरम्मत की जा रही है, बेचारे बच्चे दूसरे भवन में पढ़ने लगे। मामला जिला शिक्षा अधिकारी तक पहुंचा तो वह भी चौंक गए।
शिक्षा अधिकारी ने इसकी शिकायत आने पर जांच बिठा दी। जांच से साफ हो गया कि प्रभारी प्राचार्य कावेरी यादव की जानकारी में यह सब हुआ है। स्कूल से लोहे के चार दरवाजे, 24 खिड़कियां, 16 लोहे की रेलिंग, बाथरुम के 8 रोशनदान, दो चैनल गेट, फर्श, टाइल्स समेत सारा सामान गायब मिला। मौके पर केवल खंडहर को चुका भवन खड़ा है। इन सामानों के गायब होने की प्रभारी प्राचार्य ने न तो अपने उच्च अधिकारी को जानकारी दी और न ही थाने में एफआईआर लिखाई। माना जा रहा है कि प्रभारी प्राचार्य ने सामान उखाड़ कर ले जाने में अपनी सहमति दी थी। इससे मामला काफी गंभीर हो गया और राज्य शासन तक इसकी जानकारी चली गई। लोक शिक्षण संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने प्रभारी प्राचार्य को निलंबित कर दिया है। उन्होंने माना है कि प्रभारी प्राचार्य ने लापरवाही की और राज्य शासन को वित्तीय नुकसान पहुंचाया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा तय किया गया है।
प्रभारी प्राचार्य तो सस्पेंड हो गया है, मगर सरपंच पति पर क्या कार्रवाई की जाएगी यह स्पष्ट नहीं है। क्या नुकसान की वसूली की जाएगी? साथ ही खंडहर हो चुके स्कूल भवन की मरम्मत कैसे और किस मद से की जाएगी? यदि स्कूल भवन सही सलामत था, तो फिर मरम्मत की बात क्यों की गई? मरम्मत की बात की गई तो फिर मरम्मत क्यों नहीं की गई, यह सवाल भी खड़ा हुआ है।








