रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार स्कूली शिक्षा में अमूलचूक बदलाव को लेकर लगातार काम कर रही है। प्रदेश में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के जरिए अभिभावकों तक अपनी पैठ बनाने के बाद सरकार ने अब अन्य स्कूलों को भी प्राथमिकता से लिया है। यही कारण है कि प्रदेश में कोविड महामारी के दौरान बच्चों की पढ़ाई में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार विश्व बैंक से उधार ले रही है। इसके लिए चाक परियोजना (छत्तीसगढ़ एक्सलिरेटेड लर्निंग फार ए नालेज इकोनामी) चलाई जाएगी। विश्व बैंक ने भी राज्य सरकार के प्रस्ताव पर पांच वर्ष तक करीब ढाई हजार करोड़ रुपये किस्तों में देने की सहमति दी है। विश्व बैंक से इस वर्ष 400 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस राशि को खर्च करने के लिए राज्य को केंद्र सरकार से भी अनुमति लेनी होगी, सहमति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

छह क्षेत्रों में होगा विकास: चाक योजना से विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा का विकास, स्कूलों की अधोसंरचना विकास, शिक्षकों में व्यावसायी शिक्षा के लिए क्षमता विकास, मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और कंपोजिट स्कूल खोलकर पहली से 12वीं तक एक ही छत के नीचे सभी फैकल्टीज और सुविधाओं के साथ शिक्षा दी जा सकेगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राचार्य से लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी और राज्य स्तर के अधिकारियों इस योजना पर काम करने के लिए निर्देश दिया है।
यह दिखेगा बदलाव : सभी स्तर के स्कूलों में बुनियादी सुविधा जैसे शौचालय, पेयजल की व्यवस्था, स्मार्ट क्लासरूम, लैब-लाइब्रेरी, स्पोट्स की सुविधा मिलेगी। जिस तरह प्रदेश में स्वामी आत्मानंद स्कूल चल रहे हैं उसी की तर्ज पर अन्य स्कूलों को भी विकसित करने की योजना है।
फैक्ट फाइल
56 हजार 512 कुल स्कूल प्रदेश में संचालित
32,723 प्राइमरी, 16,442 मिडिल स्कूल प्रदेश में
2,737 हाई और 4,610 हायर सेकेंडरी स्कूल
डा. आलोक शुक्ला, प्रमुख स्कूल शिक्षा सचिव का कहना है कि राज्य सरकार ने चाक परियोजना चलाने के लिए बजट में घोषणा की है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। इस योजना से स्कूलों का उन्नयन होगा और विद्यार्थियों को इसका फायदा मिलेगा।
