कोरबा। जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के 15 गांवों में ग्रामीण मजबूरी में फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। दूषित पानी के कारण बच्चों के दांत खराब हो रहे हैं, वहीं युवाओं और बुजुर्गों में शारीरिक विकलांगता तेजी से बढ़ रही है। हालात यह हैं कि कई लोग 50 वर्ष की उम्र से पहले ही झुककर चलने को मजबूर हो गए हैं। यहां एक स्कूल में 50 बच्चों में से 35 के दांत खराब मिले।

जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के 15 गांव ऐसे हैं जिनके निवासियों को प्यास बुझाने फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है। तकरीबन 10 फीसदी आबादी इस दूषित पानी के पीने से प्रभावित हैं। कोई उपाय नहीं होने से भावी पीढ़ी पर भी खतरा मंडराने लगा है। विभाग के द्वारा लगाए गए रिमूवल प्लांट भी अब जवाब दे चुके हैं। स्थिति यह है कि दूर दराज से पानी लाने की मजबूरी हो गई है। फ्लोराइड प्रदूषित पानी पीने से दूरस्थ वनांचल ग्राम की पुरानी पीढ़ी तो शारीरिक विकलांगता का शिकार हो चुकी है और अब भावी पीढ़ी भी इसकी चपेट में आने लगी है।
प्रशासनिक उदासीनता और फ्लोराइडयुक्त पानी से बचाव के लिए स्थायी उपाय नहीं होने की वजह से अभी भी पहुंच विहीन क्षेत्रों के ग्रामीण प्रदूषित पानी ही पी रहे हैं। विभाग के द्वारा महज पांच गांव में पांच फ्लोराइड रिमूवल प्लांट के द्वारा महज पांच गांव में पांच फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने की बात कही जा रही है, जबकि प्रभावित गांव की संख्या 15 है जिनकी पांच हजार की आबादी में 10 फीसदी से अधिक लोग इससे आंशिक और पूर्ण रुप से प्रभावित बताए जा रहे हैं। जिले का सबसे बड़ा ब्लॉक होने के साथ पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक को केंद्र सरकार की आकांक्षी ब्लॉक में भी शामिल किया गया है। उसके बावजूद इस ब्लॉक के 15 गांव के ग्रामीण प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो ऐसे हैंडपंप बंद करा दिए गए हैं जिनसे फ्लोराइड युक्त पानी निकल रहा था।
पानी में फ्लोराईड की मात्रा 1.5 सीपीएम से अधिक
पीएचई विभाग के अनुसार, पानी में फ्लोराईड की मात्रा 1.5 सीपीएम से अधिक होने पर ऊक्त पानी को फ्लोराई प्रदूषित माना जाता है। ऐसे हैंडपंप और बोर जिससे इस तरह का पानी निकल रहा है उन्हें बंद कराने का काम किया गया है। प्रभावित ग्रामों में आमाटिकरा, फुलझर, कोरबी, मातीन, अमहवा, केशलपुर, पंडरीपानी, कौआताल, बिंझरा आदि गांव प्रमुख रुप से शामिल हैं। इन सभी गांव की आबादी 5 हजार लगभग बतायी जा रही है और इनमें 10 प्रतिशत की आबादी फ्लोराइड पानी से पीड़ित है और अधिकांश ग्रामीण 50 साल के उम्र तक पहुंचते पहुंचते विकलांगता का शिकार हो चुके हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीण लाठी के सहारे चल रहे हैं या झुककर चल रहे हैं।
कुएं का पानी रहता है सहारा
क्षेत्र में फ्लोराईड प्रभावित गांव में कुएं का पानी सहारा रहता है। हैंडपंप और बोर की खुदाई डेढ़ सौ से दो सौ फुट तक रहती है और इतनी गहराई से आने वाले पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक रहती है। वहीं दूसरी ओर कुंए का जल स्तर 50 से 55 फीट में मिल जाता है और इतनी ही गहराई में मिलने वाले पानी में फ्लोराइड की मात्रा नहीं रहती। शुद्ध पेयजल के रुप में कुंए के पानी का उपयोग किया जा सकता है। पंडरीपानी, बिंझरा में मनरेगा से 2 कुएं का निर्माण हुआ था जिसका उपयोग इन गांव के ग्रामीण कर रहे हैं। पीएचई ने प्रभावित गांवों में कुंआ निर्माण कराने की योजना है। जबकि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर जनपद स्तर से प्रभावित गांवों में कुंआ निर्माण कराने का प्रावधान है लेकिन इस ओर ना तो प्रभावित पंचायतों के प्रतिनिधि और जनपद के अधिकारी ध्यान देते हैं। यदि फ्लोराइड से प्रभावित गांवों में कुंआ निर्माण कराकर ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराया जाए तो बहुत हद तक बीमारी के प्रभाव को रोका जा सकता है।
ना ग्रामीणों को पता और ना स्कूल के शिक्षकों को
आश्चर्य की बात है कि पोड़ीउपरोड़ा ब्लॉक के आमटिकरा के प्राथमिक शाला के शिक्षकों के साथ गांव के निवासियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी कि वह जिस पानी का उपयोग कर रहे हैं वह प्रदूषित है। क्षेत्र में सर्वे कर रही स्वयं सेवी संस्था के कार्यकर्ताओं ने जब आमटिकरा प्राथमिक शाला में पहुंचकर इसकी जानकारी ली तो शिक्षकों और ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि वह फ्लोराइडयुक्त पानी पी रहे हैं। जबकि प्राथमिक शाला में दर्ज 50 बच्चों में 35 बच्चे ऐसे हैं जिनके दांत खराब हैं। ऐसी ही स्थिति अन्य प्रभावित गांवों के स्कूलों की भी है।
निर्धारित मानक से अधिक है मात्रा
इन प्रभावित गांवों में भू-जल स्तर से उपलब्ध जल में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित मानक 15 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक पाई गई है। कहीं- कहीं इसकी मात्रा 1.7 मिली प्रति लीटर से अधिक है जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
पानी का उपयोग प्रतिबंधित करना ही स्थायी विचार
पोड़ी उपरोड़ा सीएचसी के बीएमओ डॉ दीपक सिंह ने बताया कि, फ्लोराइड प्रभावित ग्रामों में दंत रोग विशेषज्ञ और हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम समय समय पर कैंप लगाती है। इसके साथ पानी का उपयोग नहीं करने की समझाइश भी ग्रामीणों को दी जाती है लेकिन इसका स्थायी उपचार फ्लोराइड युक्त पानी को नहीं पीने से ही होगा, इसके लिए भी ग्रामीणों को कहा गया है।
समूह जल प्रदाय योजना से होगा काम
पीएचई के कार्यपालन अभियंता रमन उरांव ने बताया कि, पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के फ्लोराइड प्रभावित कुछ गांव में फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाए गए हैं। एक प्लांट लगाने में लगभग 14 लाख का खर्च आता है। अब इन प्रभावित ग्रामों को समूह जल प्रदाय योजना से जोड़ा जा रहा है और इस योजना से ही फ्लोराइड प्रभावित ग्रामों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का काम होगा।
