नई दिल्ली: देश के ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मोदी सरकार एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है. वर्षों से चल रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रही है. 1 जुलाई 2026 से देश में ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण’ यानी VB-G RAM G योजना (जी राम जी एक्ट) को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा.

बुधवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने ग्रामीण विकास और पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति को इस देशव्यापी रोलआउट की तैयारियों की जानकारी दी. सरकार ने साफ किया है कि इस महत्वाकांक्षी योजना को शुरू करने के लिए देश के 25 प्रमुख राज्यों ने अपने हिस्से का बजट फंड पहले ही आवंटित कर दिया है.
1.51 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के तहत 95,692.31 करोड़ रुपये का केंद्रीय बजट आवंटित किया है, जो ग्रामीण रोजगार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बजट अनुमान है. जब इसमें राज्यों की हिस्सेदारी भी जुड़ जाएगी, तो इस योजना का कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है.
अब 100 नहीं, मिलेंगे 125 दिन का रोजगार
इस नए कानून के तहत सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण मजदूरों को मिलेगा. मनरेगा में जहां साल में अधिकतम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी, वहीं ‘जी राम जी एक्ट’ के तहत इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है. इससे ग्रामीण परिवारों की सालाना कमाई में सीधा इजाफा होगा. अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हर ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य इस योजना के हकदार होंगे.
चेहरा पहचानने वाले ‘स्मार्ट जॉब कार्ड’ और समय पर भुगतान
पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पुराने जॉब कार्ड्स को नए ‘स्मार्ट जॉब कार्ड’ से बदला जाएगा. इन कार्ड्स में फेस रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली) तकनीक होगी, जिससे फर्जी हाजिरी पर पूरी तरह रोक लगेगी.
मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए पेमेंट सिस्टम को सख्त बनाया गया है. अब काम पूरा होने पर लंबे समय तक पैसों का इंतजार नहीं करना होगा. मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के बैंक या पोस्ट ऑफिस खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए साप्ताहिक (Weekly) आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के अधिकतम 15 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा.
काम न मिलने पर मिलेगा बेरोजगारी भत्ता
यदि कोई मजदूर काम की मांग करता है और प्रशासन तय समय सीमा के भीतर उसे रोजगार देने में विफल रहता है, तो भी मजदूर को आर्थिक नुकसान नहीं होगा. कानून के तहत वह बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा, जिसका भुगतान सीधे सरकार को करना पड़ेगा.
