- हाथियों की मौत रोकने छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का विशेष प्रशिक्षण=
- जून के पहले हफ्ते जुटेंगे देश के शीर्ष विशेषज्ञ
रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन्यप्राणियों, विशेष रूप से हाथियों और हाथी शावकों की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप लगातार गंभीर और संवेदनशील पहल कर रहे हैं। वन मंत्री श्री कश्यप की विशेष चिंता और स्पष्ट मंशा के अनुरूप अब राज्य में वन्यजीवों की असमय मृत्यु रोकने तथा उनके बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए वन विभाग द्वारा एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की जा रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में जून के प्रथम सप्ताह में राष्ट्रीय स्तर का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विशेष प्रशिक्षण का विषय “मृत्यु से सीख: एशियाई हाथियों की मृत्यु जांच के आवश्यक तत्व” रखा गया है। वन मंत्री केदार कश्यप का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि वन्यप्राणियों के स्वास्थ्य, उपचार, वैज्ञानिक जांच और समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप को भी उतनी ही प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसी सोच के साथ यह विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

शीर्ष विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून तथा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। विशेषज्ञ अधिकारियों और डॉक्टरों को हाथियों तथा अन्य वन्यप्राणियों में होने वाली बीमारियों की पहचान, उपचार, पोस्टमार्टम की वैज्ञानिक प्रक्रिया, बिसरा परीक्षण और फॉरेंसिक जांच की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देंगे। वन मंत्री केदार कश्यप चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का वन अमला राष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक क्षमता से सुसज्जित हो, ताकि किसी भी वन्यजीव की बीमारी अथवा मृत्यु की स्थिति में त्वरित और सटीक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
हाथी शावकों की मौतों का होगा विश्लेषण
विगत एक वर्ष में रायगढ़ एवं धरमजयगढ़ क्षेत्र में हाथी शावकों की हुई मौतों को वन मंत्री केदार कश्यप ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। उनके निर्देश पर प्रशिक्षण के दौरान पिछले दो वर्षों में हुई वन्यजीव मौतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बिसरा परीक्षण रिपोर्ट एवं विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ वास्तविक मामलों पर चर्चा कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की प्रभावी रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रशिक्षण में राज्य के सभी चिड़ियाघरों, टाइगर रिजर्व, अभयारण्यों में पदस्थ पशु चिकित्सकों सहित हाथी प्रभावित वन मंडलों के डीएफओ, उप-वनमंडलाधिकारी, वन क्षेत्रपाल तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा। वन मंत्री केदार कश्यप की प्राथमिकता है कि मैदानी स्तर पर कार्यरत अमला वैज्ञानिक रूप से इतना सक्षम हो कि वन्यजीवों के स्वास्थ्य संरक्षण में किसी प्रकार की कमी न रहे।
हो चुका है प्रारंभिक प्रशिक्षण
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर इससे पूर्व 7 अप्रैल 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 150 से अधिक अधिकारियों एवं डॉक्टरों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब इसी पहल को और व्यापक एवं व्यवहारिक स्वरूप दिया जा रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि राज्य सरकार वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक जांच प्रणाली और प्रशिक्षित अमले के माध्यम से छत्तीसगढ़ में हाथियों एवं अन्य वन्यप्राणियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा का दायित्व भी है।
