रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित उचित मूल्य दुकानों का कामकाज आने वाले दिनों में प्रभावित हो सकता है। प्रदेशभर के राशन दुकान संचालकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की घोषणा की है। संघ का दावा है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में राज्य की लगभग 13 हजार राशन दुकानें बंद रह सकती हैं, जिससे लाखों हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न नहीं मिल पाएगा।

राशन विक्रेताओं का कहना है कि वर्तमान में मिलने वाला कमीशन बढ़ती लागत के मुकाबले बेहद कम है। उनका तर्क है कि दुकान संचालन में किराया, कर्मचारियों का मानदेय, बिजली और अन्य खर्च लगातार बढ़े हैं, जबकि मार्जिन राशि में अपेक्षित संशोधन नहीं किया गया। इसी वजह से उन्होंने प्रति क्विंटल 150 रुपये मार्जिन तय करने की मांग सरकार के सामने रखी है।
भुगतानों में लंबे समय से हो रही है देरी
संघ के अनुसार कई प्रकार के भुगतानों में भी लंबे समय से देरी हो रही है। उनका कहना है कि मार्जिन मनी, बारदाना मद और आधार आधारित वितरण से जुड़ी राशि का भुगतान समय पर नहीं मिलने से संचालकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। कई दुकानदारों को निजी संसाधनों और उधारी के सहारे व्यवस्था संभालनी पड़ रही है।
नई वितरण प्रणाली को लेकर संचालकों ने जताया असंतोष
नई वितरण प्रणाली को लेकर भी संचालकों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि एक साथ कई महीनों का राशन वितरण किए जाने से दुकानों में भीड़ बढ़ रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण संबंधी दिक्कतें सामने आ रही हैं। इसके अलावा तौल में अंतर के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई की मांग भी उन्होंने उठाई है।
राशन विक्रेता संघ ने शक्कर वितरण पर अधिक कमीशन, दुकानदारों के लिए बीमा सुरक्षा, स्टॉक सत्यापन प्रक्रिया में सरलीकरण तथा तकनीकी खामियों से होने वाली समस्याओं के समाधान की मांग की है। साथ ही प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव में कार्रवाई किए जाने के मामलों पर भी रोक लगाने की बात कही है।
मांगे पूरी नहीं होने पर 5 जुलाई से करेंगे हड़ताल
संघ का कहना है कि यदि उनकी नौ सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 5 जुलाई से शुरू होने वाली हड़ताल का असर पूरे प्रदेश की राशन वितरण व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और राशन विक्रेता संघ के बीच होने वाली बातचीत को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
