रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के व्यापारियों और उद्यमियों को बड़ी प्रशासनिक राहत देते हुए नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में संचालित 43 प्रकार के व्यापार और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए स्थानीय निकायों से ट्रेड लाइसेंस (व्यापार अनुज्ञप्ति) लेने और उसका नवीनीकरण कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।

इसके लिए छत्तीसगढ़ नगर पालिका (व्यापार अनुज्ञापन) नियम, 2025 में संशोधन कर नया प्रावधान जोड़ा गया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह लाइसेंस मुक्त व्यवस्था नहीं होगी। संबंधित व्यवसायों को अपने क्षेत्र से जुड़े अन्य कानूनों के तहत आवश्यक लाइसेंस या पंजीयन पहले की तरह अनिवार्य रूप से रखना होगा। साथ ही स्थानीय निकायों को निर्धारित पंजीयन शुल्क भी देना पड़ेगा।
क्या बदलाव हुआ है
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा किए गए इस संशोधन के अनुसार नियम-17 के बाद नया नियम-18 जोड़ा गया है। इसके तहत नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में सूचीबद्ध व्यवसायों को अब व्यापार अनुज्ञप्ति प्राप्त करने या उसका नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। यह संशोधन व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब व्यापारियों को एक ही काम के लिए नगर निकाय से अलग ट्रेड लाइसेंस लेने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा, यदि उनके पास संबंधित नियामक संस्था का वैध लाइसेंस या पंजीयन मौजूद है।
किन व्यवसायों को मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था का लाभ 43 श्रेणियों के व्यवसायों को मिलेगा। इनमें प्रमुख रूप से-खुदरा एवं थोक दुकानें किराना और राशन दुकानें, फल एवं सब्जी विक्रेता, डेयरी उत्पाद विक्रेता, बेकरी मिठाई दुकानें रेस्टोरेंट एवं भोजनालय कैटरिंग और क्लाउड किचन मांस, मछली और पोल्ट्री व्यवसाय पैकेज्ड फूड एवं पेयजल इकाइयां होटल, लॉज एवं गेस्ट हाउस सिनेमाघर और मल्टीप्लेक्स आईटी एवं सॉफ्टवेयर कंपनियां गोदाम और लॉजिस्टिक्स ई-कॉमर्स, फुलफिलमेंट सेंटर बैंक एवं बीमा कार्यालय कोचिंग संस्थान जिम एवं फिटनेस सेंटर, ब्यूटी पार्लर एवं सैलून, मेडिकल स्टोर, अस्पताल, फैक्ट्री एवं औद्योगिक इकाइयां जैसे प्रतिष्ठान शामिल हैं।
ट्रेड लाइसेंस खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि, व्यवसाय बिना किसी अनुमति के संचालित होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया गया है कि संबंधित व्यवसायों को अपने क्षेत्र के अनुसार वैध लाइसेंस या पंजीयन रखना अनिवार्य होगा। उदाहरण के लिए दुकानों के लिए दुकान एवं स्थापना अधिनियम के तहत पंजीयन। खाद्य कारोबार के लिए एफएसएसएआई का लाइसेंस या पंजीयन। मेडिकल स्टोर के लिए औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के तहत ड्रग लाइसेंस । फैक्ट्रयों के लिए फैक्ट्री अधिनियम अथवा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता के तहत आवश्यक अनुमति।
पंजीयन शुल्क फिर भी देना होगा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि, ट्रेड लाइसेंस की बाध्यता हटने के बावजूद संबंधित व्यवसायों को नगर निकायों को नियम-5 के अनुसार निर्धारित पंजीयन शुल्क देना होगा। यानी लाइसेंस की प्रक्रिया समाप्त होगी, लेकिन स्थानीय निकायों के राजस्व का स्रोत पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
घटेगी कागजी प्रक्रिया
जानकारों के अनुसार, इससे व्यवसाय शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया सरल होगी। पहले व्यापारियों को एक ही प्रतिष्ठान के लिए नगर निकाय का ट्रेड लाइसेंस, एफएसएसएआई, दुकान एवं स्थापना पंजीयन, ड्रग लाइसेंस या अन्य विभागीय अनुमति जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। अब नगर निकाय के ट्रेड लाइसेंस की अलग व्यवस्था समाप्त होने से अनुपालन का बोझ कम होगा और कारोबार शुरू करने में लगने वाला समय तथा कागजी प्रक्रिया घटेगी।
