भिलाई
भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के 4 शहरों रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, और कोरबा को पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत इलेक्ट्रिक बर्सों के संचालन की मंजूरी दी है। भिलाई-दुर्ग में सिटी बस संचालन करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। पीएम ई-बस से वह पूरी हो जाएगी। भिलाई-दुर्ग में इस तरह की 50 बसें दौड़ेगी। वर्तमान में निजी बसों का संचालन हो रहा है, सिटी बस शुरू नहीं होने से लोग निराश थे, पीएम ई-बस से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

भारत सरकार की योजना के मुताबिक 20 से 40 लाख तक की आबादी वाले शहरों को 150, 10 से 20 लाख व 5 से 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों को 100-100 ई-बस देने की योजना है। इसी तरह से 5 लाख से कम आबादी वाले शहरों को 50 पीएम ई-बस दिए जाने की योजना है। इसके दायरे में दुर्ग भिलाई आया है और उसे 50 मीडियम ई-बस दिया जाना है। वहीं रायपुर को 100 मीडियम ई-बस बिलासपुर को 35 मीडियम, 15 मिनी ई-बस और कोरबा को 20 मीडियम व 20 मिनी ई-बसों की स्वीकृति मिली है।
बस डिपो का भी होगा विकास
योजना के तहत केंद्र सरकार शहरों को बर्सों की खरीद व उनके संचालन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें एक बड़ा हिस्सा शहरों में बस डिपो के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में खर्च किया जाएगा।
बरती जाएगी पारदर्शिता
केंद्र से प्रोजेक्ट के तहत दिए जाने वाली राशि का तीसरी पार्टी से ऑडिट अनिवार्य होगा। जिससे पूरी पारदर्शिता रहे। बस संचालन जिन शहरों में होगा, उनको हर 3 महीने में बसों के संचालन का हिसाब देना होगा। केंद्र सरकार की यह योजना राज्यों को मिलने वाली केंद्रीय मदद को पारदर्शिता और उनके प्रदर्शन से जोडऩे की केंद्र की कोशिश का हिस्सा है।
मेट्रो का विकल्प
भारत सरकार की मंशा है कि यह योजना शहरों ममें मेट्रो के विकल्प के तौर पर हो। यह लोगों को किफायती, भरोसेमंद परिवहन की सुविधा मिले। इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत से शहरी परिवहन में क्रांति आएगी। यह पर्यावरणीय संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधाएं देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
पर्यावरण के लिए बेहतर
इन बसों के शुरू होने से पर्यावरणीय प्रदूषण में कमी आएगी। शहरों की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा, उर्जा की बचत होगी। वर्तमान में वायु प्रदूषण शहर में अधिक है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
इस तरह से होगा संचालन
बसों का क्रय व संचालन एजेंसी का चयन केंद्र सरकार की ओर से किया जाएगा। केंद्रीय सहायता तय किलोमीटर संचालन के हिसाब से दी जाएगी। अगर बस इससे कम किलोमीटर चलती हैं, तब केंद्रीय सहायता उसी के अनुपात में कम हो जाएगी। भारत सरकार ने तय किया है कि शहरों के प्रदर्शन के आधार पर पैसा दिया जाएगा।
