हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा मांगेगें,

एक बाग नहीं, एक खेत नहीं, हम सारी दुनिया मांगेगंे।
हाई राईज बिल्ंिडग के टाप फ्लोर में अपने आफीस में बैठकर नीचे जमीन को देखता हूॅ, तो लोग, चीजे छोटी नजर आती है। तब मन में भ्रम होता है, कि मैं बहुत ऊंचाई में हूॅ, उच्च हूॅ, बड़ा हूॅ, लेकिन जब हकीकत से रूबरू होता हूॅ, तो पता चलता है ये ऊंचाई मेरे कारण नही है, अपितु बिल्ंिडग के ऊंचाई के कारण है, और इस बिल्ंिडग को बनाने वाले मजदूरों के कारण है। जिसमें से कई इसी बिल्ंिडग में जमीदोज भी हो गये। और सोचने के लिये मजबूर हो जाता हूॅ।
‘‘इस जहां में यदि मजदूर का,
नामों निशान नही होता।
तो, न तो हवा महल होता,
और न ताजमहल होता।।’’
काल मार्क्स के अनुसार आज तक का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है। लेकिन मुझे लगता है कि हम वर्तमान समय में परस्पर निर्भरता की युग में जी रहे है। जहॉ विकास का पैमाना मजदूर (लेबर) को एक मशीन या यंत्र या गुलाम के तौर पर माना जाना उचित नही है जैसा कि औद्योगिक युग के समय एक आम धारणा थी। अपितु यह मानव संसाधन के शक्ल में इसकी उपयोगिता है।
हम परस्पर निर्भरता के युग मे रह रहे है। जिसका संचालन एक चक्रिय क्रम मे होता है। जिसमे मालिक मजदूर का ध्यान रखे, मजदूर प्रोडक्ट का ध्यान रखे, प्रोडक्ट ग्राहको का और ग्राहक मालिक, इस प्रकार यह चक्रिय क्रम समाज और देश दोनो के लिये सहायक होगा।
वैसे तो इतिहास एवं कैलेण्डर में विभिन्न तिथि/दिवस से भरा पड़ा है। लेकिन इसमें से महज कुछ तिथि जिनका अपना इतिहास होता है तथा वर्तमान में इनकी प्रासंगिकता तथा बुनियाद को भविष्य में संजोकर रखने वाले तिथि को ही अमरत्व प्राप्त है। 01 मई ऐसी ही तिथि है जिसका अपना इतिहास अमेरिका के शिकांगो के हे-मार्केट से शुरू होकर विश्व के पूरे देशों में इसकी महत्ता तथा प्रसांगिकता बरकरार है तथा इसकी बुनियाद कितनी गहरी एवं सृजित है कि आज भी विश्व के किसी धरातल पर मजदूर से परे किसी भी परिकल्पना को साकार करना संभव नही है।
वैसे तो आज भी विश्व के किसी भी कोने में मजदूरों को उनके अधिकारों से किसी न किसी रूप में वंचित रखा जा रहा है। ऐसा ही वाक्या दिनांक 04 मई 1886 को हेमार्केट में 08 घंटे के कार्य अवधि के जायज मांगो के संबंध में एकत्र हुई भीड़ के ऊपर बम से हमला हुआ फलस्वरूप 07 श्रमिक मारे गये तथा 100 से अधिक श्रमिक घायल हुये। आंदोलन के फलस्वरूप अंततः मजदूरों को 1889 से 08 घंटे की कार्य अवधि निर्धारित की गयी।
भारत वर्ष में भी लेबर किसान सोशलिस्ट ऑफ हिन्दुस्तान के बेनर तले 01 मई 1923 से मद्रास दिवस के रूप में मनाया जाता है।
मजदूर, पसीना और नींद –
मजदूर के कारण ही तो ‘‘पसीने’’ का महत्व पता चलता है। तभी तो विश्व के धनी व्यक्तियो मे से प्रसिद्ध बिलेनियर बिलगेट्स को कहना पड़ा।
हथेली में अमीरी तब तक लिखी रहती है,
जब तक माथे से पसीना बहता रहता है।
एवं पसीने से भीगा हुआ सिक्का,
दुनिया की सबसे खुबसुरत वस्तु है।।
मेहनतकश, खून पसीना बहाकर, अपने परिवार का पालन पोषण करता है। विपरित हालातो मे भी काम करने के बावजूद आमतौर पर ये अवांछित बीमारी से दूर रहते है। इन्हे सोने के लिये नींद की दवा की आवश्यकता नही होती है। इसीलिये तो इनके संदर्भ में कहा जाता है –
सो जाते है, फुटपाथ पे अखबार बिछाकर
मजदूर कभी नींद की गोली नही खाते।
तो दूसरी ओर बहुत से अमीर व्यक्तियों को बिना गोली के नींद नही आती। हम इस बात से अवगत ही है कि नींद हमारे जीवन मे कितना महत्वपूर्ण है। भारतीय उप महाद्वीप के सेप (एस.ए.पी.) विश्व का प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर कंपनी श्री रंजन दास उम्र 42 वर्ष, दिन मे महज 4 घण्टे ही सोते थे, परिणाम असमय हृदयघात से मृत्यु। विश्व प्रसिद्ध डांसर माईकल जैकसन के पास करोड़ो के बिस्तर थे, नही था, तो नींद?
यकीनन किसी भी चीज के दो पहलू होते है, किसी एक पहलू के होने से, दूसरा पहलू का अभाव हो सकता है। इसीलिये जीवन मे संतुलन की महती अवश्यकता है। और जो इस संतुलन को प्राप्त कर लेता है। वह सुखी है। चाहे वह मजदूर हो या फिर अमीर।
सुलगते प्रश्न ?
आज आवश्यकता इस बात की है, कि उद्योगपति के फैक्ट्री से धुआं जो प्रगति की निशानी है, वह निकले, साथ ही इस बात को भी सुनिश्चित की जावे की मजदूरो के घर में चुल्हा से धुये निकले जो उनके पेट भरने का प्रतीक है।
और अंत में:-
अगर आप गरीब पैदा होते है तो इसमे आपका दोष नही है,
लेकिन मरते गरीब है तो गलती आपकी है।
और शायद इसीलिये पेट्रोल पम्प मे क्लर्क पद पर कार्यरत धीरूभाई अम्बानी ग्रुप का एम्पायर खड़ा किया। दिहाड़ी मजदूर, किसी समय 100 रूपये का नोट नही देख पाने वाली कल्पना सरोज ने हजारो करोड़ का कमानी ग्रुप की स्थापना की। यह इस बात का द्योतक है, अमीरी या गरीबी हमारी मानसिक स्थिति होती है। फिर भी मजदूरों के संबंध मे
किसी को क्या बताये कि कितने मजबूर है हम
बस इतना समझ लिजीये कि मजदूर है हम।
वाली इस धारणा को बदले जाने का समय है।
डॉ. रज्जू कुमार
एन. एक्सीडेंटल इंजीनियर
मोटिवेशनल स्पीकर, 5 जी लाईफ सूत्र
