रायपुर। Mahashivratri 2023 Special आज पूरे देश में महाशिवरात्रि मनाया जा रहा है। भक्त अपने प्रिय भगवान भोले व माता पार्वती से अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना कर रहे हैं। ऐसे में रायपुर में भी भगवान शिव का एक प्रसिद्ध मंदिर है। जो बूढ़ा तालाब के नाम से है औक जिसे बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि 500 साल पहले राजा ब्रह्मदेव ने बूढ़ा तालाब खुदवाया था। आदिवासियों के इष्टदेव बूढ़ा देव के नाम पर यह तालाब मशहूर है।

ऐसी मान्यता है कि तालाब के किनारे शिवलिंग था। उसके आसपास नागों का वास था और हमेशा नाग शिवलिंग से लिपटे रहते थे। तब मंदिर बनवाकर शिवलिंग को प्रतिष्ठापित किया गया। वर्तमान में यह बूढ़ेश्वर मंदिर के नाम से मशहूर है। वैसे तो रोजाना ही इस मंदिर में भक्त पूजा-पाठ के लिए आते रहते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि में 24 घंटे मंदिर में भक्ति-उल्लास छाया रहता है। किसी समय शहर के सबसे आखिरी छोर में खोदवाया गया बूढ़ातालाब वर्तमान में शहर का हृदय स्थल बन चुका है। सैकड़ों साल पुराने मंदिर का नवनिर्माण लगभग 70 साल पहले पुष्टिकर ब्राह्मण समाज ने करवाया।
पहले यह छोटा सा मंदिर था। 1952 में पुष्टिकर समाज ने भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। इसके बाद से मंदिर का संचालन पुष्टिकर समाज द्वारा ही किया जा रहा है।
मंदिर के ठीक सामने 200 साल से वटवृक्ष
बूढ़ेश्वर मंदिर के ठीक सामने चौराहे पर वट वृक्ष है। यह 200 साल से अधिक पुराना है। यहां हर साल वट वृक्ष के नीचे पूजा करने महिलाओं का हुजूम उमड़ता है। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र इस वृक्ष के नीचे वट सावित्री व्रत पूजा करने सैकड़ों महिलाएं पहुंचती हैं। इसी वृक्ष के नीचे ही नृसिंह जयंती पर नृसिंह लीला का भव्य मंचन किया जाता है, जो पूरे प्रदेशभर में प्रसिद्ध है।
गर्भगृह में तीन दरवाजे
गर्भगृह में तीन तरफ दरवाजे हैं जहां से भक्त आसानी से दर्शन कर सकते हैं। महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का भांग, धतूरा, बेलपत्र, चांदी के बर्क से श्रृंगार होता है।
भस्म आरती
मंदिर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित श्मशानघाट है, पर्व विशेष पर यहां की भस्म आरती मशहूर है।
शिव परिवार समेत अन्य देवगण
मंदिर में गणेश, कार्तिकेय और माता पार्वती भी प्रतिष्ठापित हैं। साथ ही ब्रह्मा, विष्णु, लक्ष्मी, सरस्वती, वराह अवतार, नरसिंह अवतार, महर्षि बाल्मिकी, राधा-कृष्ण, श्रीराम, हनुमान, संतोषी माता विराजित हैं।
खुले आसमान तले भैरव बाबा
इनके अलावा भगवान शिव के अवतार भैरव बाबा खुले आसमान तले विराजे हैं। मंदिर प्रांगण में स्थित कुआं सैकड़ों साल पुराना है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह कुआं कभी नहीं सूखा। 12 महीने लबालब पानी भरा रहता है।
