रायपुर। मास्टर प्लान का उल्लंघन कर साइंस कालेज और एनआइटी के पास बनवाई जा रही चौपाटी को लेकर हाई कोर्ट ने अब नगर एवं ग्राम निवेश विभाग सहित संबंधित ठेकेदार को भी नोटिस जारी किया है। वहीं, इससे पूर्व मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय एस अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष सरकार की ओर से दलील पेश की गई थी, जिसमें कहा गया था कि याचिका में जिक्र किए गए स्थल पर निर्माण कार्य नहीं करवाया जा रहा है।
पूर्व मंत्री राजेश मूणत की जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
जिस पर याचिकाकर्ता पूर्व मंत्री राजेश मूणत की ओर से आपत्ति की गई और सबूत के तौर पर उन्होंने गूगल मैप हाई कोर्ट में पेश किया है। इससे पिछली सुनवाई में डिवीजन बेंच ने राज्य शासन, स्मार्ट सिटी लिमिटेड, नगर निगम और कलेक्टर रायपुर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इसके बाद अब कोर्ट ने सुनवाई के बाद नगर एवं ग्राम निवेश सहित ठेकेदार से जवाब मांगा है।
वहीं, चौपाटी को हटाने के लिए भाजपा के पूर्व मंत्री मूणत की अगुवाई में पार्षद सहित अन्य आला नेताओं ने लगभग 11 दिनों तक प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि निर्माणाधीन चौपाटी के पास एजुकेशन हब है। चौपाटी निर्माण से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा हो सकता है।
इससे बच्चे परेशान होंगे। इसी दौरान भाजपा पार्षद दल सहित पूर्व मंत्री की टीम ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी थी, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री ने टीम भेजकर जांच करवाने का आश्वासन दिया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह आंदोलन खत्म किया गया।
पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा, हमने सारे दस्तावेज पहले ही पेश कर दिए हैं। शासन की ओर से जूठी जानकारी कोर्ट को दी जा रही थी, हमने गूगल मैप हाई कोर्ट में पेश किया है। इस प्रोजेक्ट को रद करना ही पड़ेगा। अगर फैसला हमारे पक्ष में नहीं आएगा तो हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
रायपुर नगर एवं ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक संदीप बागड़े ने कहा, अभी तक मुझे नोटिस के बारे में जानकारी नहीं है। नोटिस के आधार पर कोर्ट में जवाब पेश किया जाएगा।
