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  • आधे-अधूरे स्कूल भवन को चंदा और श्रम दान के जरिए पूर्ण कर रहे ग्रामीण…
  • Feature

आधे-अधूरे स्कूल भवन को चंदा और श्रम दान के जरिए पूर्ण कर रहे ग्रामीण…

Nkc News Desk November 20, 2025

गरियाबंद। ट्राइबल और शिक्षा विभाग के बीच चल रही खींचतान की वजह से स्कूल भवन का निर्माण पूर्ण नहीं हुआ था. बड़ी रकम हासिल करने के बाद ठेकेदार ने आगे काम करने से इंकार कर दिया. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होते देख पालकों ने चंदा एकत्रित कर श्रमदान के जरिए निर्माण पूरा करने का बीड़ा उठाया.

मामला बजाड़ी पंचायत के आश्रित पारा नयापारा प्राथमिक शाला का है, जिसमें अतिरिक्त भवन के निर्माण के लिए स्कूल जतन के तहत वर्ष 2022 में 14 लाख रुपए की मंजूरी मिली थी. काम की शुरुआत ट्राइबल विभाग की देख-रेख में हुई. निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले ही 80 फीसदी रकम ठेकेदार को आवंटित कर दी गई. जिम्मेदार अफसरों ने फाइल में भवन को पूर्ण दिखाने के लिए सामने के दीवारों की रंगाई-पुताई करवा दी. जतन योजना का सिम्बोल लगाकर काम को पूर्ण बता दिया.

ग्राम के उपसरपंच नरमल नागेश ने बताया कि गांव में 45 बच्चे वार्ड 5 स्थित पुराने स्कूल में पढ़ने जाते हैं. वार्ड 12 में बन रहे नया स्कूल भवन का साल भर से काम बंद है. भवन को सामने से देखने में पूर्ण लगेगा, लेकिन अंदर काम अधूरा है. खिड़की-दरवाजे नहीं लगाए गए हैं, फ्लोरिंग और प्लास्टर का काम भी अधूरा है.

वार्ड 5 स्थित स्कूल के दूर पड़ने की वजह से बच्चे स्कूल जाने से परहेज करते हैं. ऐसे में नए स्कूल भवन का निर्माण स्वयं के खर्च से करने की दिशा में कदम उठाते हुए पालकों से 500-500 रुपए एकत्रित कर रहे हैं. मिले पैसों से अभी तक 4 दरवाजे लगाए गए हैं. फ्लोरिंग का भी काम किया गया. कुल मिलाकर 40 हजार खर्च हुए, लेकिन 15 हजार एकत्र हुए हैं. पालकों से और पैसा एकत्रित होने के बाद भवन की पुताई करेंगे. लेकिन दो-तीन दिन के भीतर नए भवन में स्कूल लगवा कर रहेंगे.

80 फीसदी खर्च, 80 फीसदी काम अधूरा
मैंनपुर ब्लॉक में 114 काम के लिए 16 की मंजूरी मिली थी. इनमें से अब भी 97 कार्य अधूरे हैं, किन्तु 994.84 लाख खर्च कर दिए. नयापारा की तरह मगर रोड़ा, देवडोंगर, जयंती नगर समेत वनांचल क्षेत्र के 60 से ज्यादा स्कूल भवन है, जिसका फिनिशिंग कार्य बाकी है.

बताया जाता है कि 9 टेंडर के बाद भी मैनपुर ब्लॉक में कोई काम नहीं ले रहा था. ऐसे में ट्राइवल डिपार्ट को काम दिया गया. शुरुआती दौर में काम तेजी से चलता रहा. लेकिन बाद में शिक्षा विभाग ने पैसे देना बंद कर दिया. पिछले एक साल से शिक्षा विभाग 6 करोड़ रुपए रोक के रखा है, जिसके कारण अधूरे भवन को पूरा नहीं किया जा रहा है.

जिपं अध्यक्ष ने कही एफआईआर की बात
पूर्ववर्ती सरकार ने स्कूल जतन के रुपए शिक्षा विभाग की दिए. शिक्षा विभाग ने निर्माण अथवा मरम्मत के लिए आरईएस और ट्राइवल विभाग को एजेंसी बनाया. काम की निगरानी के लिए तत्कालीन कलेक्टर ने समिति भी बनाई थी. फिर सबमिट किए गए प्रोग्रेस रिपोर्ट की क्रॉस चेकिंग के लिए अन्य विभाग के अफसरों को भी ग्राउंड पर भेजा.

कमेटियों की रिपोर्ट भले जो भी आई हो, लेकिन एजेंसी डिपार्ट ने जो बताया उसी को सही मान करोड़ों का वारा न्यारा कर दिया गया. ठेकेदार पैसा लेकर रफू चक्कर हो गए. जिम्मेदार अफसरों ने भी चुप्पी साध ली है. यही वजह है कि नयापारा जैसे कई स्कूलों को पूर्ण कराने अब पालकों को जद्दोजहद उठानी पड़ रही है.

मामले की जानकारी मिलने पर जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप ने कहा कि ये शर्मनाक है. शासन की छवि धूमिल हो रही है. जिला पंचायत बैठक में जतन योजना के सूक्ष्म जांच हेतु कमेटी गठित करने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा. दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की मांग की जाएगी.

उच्च कार्यालय को भेजी रिपोर्ट
मामले में मैंनपुर बीआरसीसी शिव कुमार नागे ने कहा कि जहां भवन की जरूरत थी, उसकी सूची मांगी गई. मंजूरी मिली तो कार्य एजेंसी दूसरे विभाग को बनाया गया. समय-समय पर रिपोर्ट मांगे जाने पर संकुल समन्वयकों से रिपोर्ट बनाए गए है. जिसके मुताबिक स्वीकृत 114 कार्य में से केवल 17 पूर्ण है. 97 कार्य आज भी अधूरे है. काम कहीं भी चालू नहीं है. उच्च कार्यालय को रिपोर्ट भेज दी गई है.

सवाल पर झल्लाए डीईओ
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर ने कहा कि चंदा लेकर पालक अधूरे काम को पूरा कर रहे हैं, यह जानकारी आप के माध्यम से पता चली है, दिखावते है. सवाल यह है कि दो-साल से पैसे रिलीज होने के बाद भी अधूरे निर्माण है, जिसकी जानकारी हर बार बैठक में उच्च अधिकारियों को दे रहे है. क्या कार्रवाई होगी, क्यों नहीं हो रही है, इस पर सवाल पूछने पर अधिकारी झल्ला जा रहे हैं.

Tags: आधे-अधूरे स्कूल भवन चंदा और श्रम दान पूर्ण कर रहे ग्रामीण

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  • ग्राम पंचायत विजयनगर में जनसमस्या निवारण शिविर में कृषि मंत्री हुए शामिल* जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती अपनाने किया प्रेरित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण ही सुशासन की पहचान – मंत्री श्री नेताम बलरामपुर, सुशासन को जन-जन तक पहुँचाने एवं आमजनों की समस्या का त्वरित निराकरण और शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम छोर तक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत विजयनगर में कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, अन्य जनप्रतिनिधिगण, वनमण्डलाधिकारी श्री आलोक बाजपेई, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर सहित शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए। इस दौरान शिविर में विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने स्टालों का अवलोकन कर प्राप्त आवेदनों एवं निराकरण की जानकारी ली। इस दौरान 05 बच्चों का अन्नप्राशन, 05 गर्भवती माताओं के गोदभराई की रश्म की गई। साथ विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री का वितरण किया गया। शिविर में मंत्री रामविचार नेताम ने संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से आमजनों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है और यही सुशासन की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि शासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है तथा प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने एग्रीस्टेक में किसानों को पंजीयन कराने की बात कही उन्होंने कहा कि पंजीयन के अभाव में कई महत्वपूर्ण योजनाओं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, धान खरीदी, खाद-बीज प्राप्त करने में कठिनाई आ सकती है उन्होंने एग्रीस्टेक में अवश्य रूप से पंजीयन करने की बात कही। मंत्री श्री नेताम ने रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए किसानों को जैविक खाद एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखती है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित उत्पादन भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। मंत्री श्री नेताम ने किसानों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराते हुए टपक सिंचाई पद्धति अपनाने तथा दलहन सहित अन्य फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि आवश्यकता के अनुरूप उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लेने की बात कही। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जनता के प्रति जवाबदेही एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। शिविर में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं, मांगें और शिकायतें प्रस्तुत की। जिनका संबंधित विभागों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया गया। साथ ही शेष आवेदनों को निराकरण किया जा रहा है। सुशासन शिविर बना जल संरक्षण, जैविक खेती और स्वच्छता का जनजागरूकता मंच प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दे रहा सुशासन तिहार आम जनता की सहूलियत के लिए आयोजित किए जा रहे सुशासन शिविर अब सिर्फ समस्याओं के समाधान तक ही सीमित नहीं रह गया हैं, बल्कि ग्रामीणजनों को पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जागरूक कर रहा है। रामचन्द्रपुर विकासखंड के विजयनगर में लगे सुशासन शिविर में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण, नील हरित शैवाल, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन से जुड़े कई जीवंत मॉडल प्रदर्शित किया गया। शिविर में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर के साथ-साथ सोख्ता गड्ढा, जैविक खेती के लिए नील-हरित शैवाल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के जीवंत मॉडलों ने ग्रामीणों को आकर्षित किया। शिविर में जल संरक्षण की एक और बेहद आसान और असरदार तकनीक 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर, सोख्ता गड्ढा का सजीव मॉडल बनाकर लोगों को जागरूक किया गया। जो अतिरिक्त पानी या बारिश के जल को संरक्षण का बेहतर तरीका है। शिविर में बने इस मॉडल को देखकर कई ग्रामीणों ने इसे अपने घरों और हैंडपंपों के पास बनाने की बात कही। कृषि विभाग द्वारा नील-हरित शैवाल बनाने की जानकारी दी गई।। शिविर में एक छोटा तालाबनुमा ढांचा बनाकर इसे तैयार करने और इस्तेमाल करने की विधि दिखाई गई। साथ ही हरी खाद और संतुलित उर्वरक के सम्बंध में भी बताया गया। किसानों को बताया गया कि धान की फसल के लिए यह एक बेहतरीन प्राकृतिक नाइट्रोजन देने वाला जैव उर्वरक है। इसके इस्तेमाल से न केवल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और फसल की पैदावार सुधरती है, खेती की लागत कम करने का यह तरीका मौजूद किसानों को बेहद पसंद आया। पर्यावरण को साफ-सुथरा और सेहतमंद बनाए रखने के लिए शिविर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत कचरा प्रबंधन का भी सजीव प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों को समझाया गया कि कैसे वे अपने घरों के गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं। अलग-अलग रंगों के डस्टबिन के माध्यम से गीले कचरे से जैविक खाद बनाने और सूखे या खतरनाक कचरे के सही निपटान की जानकारी दी गई।
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