कहते हैं भारत का दिल गांवों में बसता है. गांवों में स्वशासन को मजबूत करने के लिए हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है. इस दिवस का मनाने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्वशासन के साथ-साथ पंचायतों और ग्राम सभाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने 24 अप्रैल 2010 को पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस घोषित किया था.बता दें कि भारत में पंचायती राज व्यवस्था को तीन स्तरों में विभाजित किया गया है, जिसमें ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, मध्यवर्ती स्तर पर ब्लॉक पंचायत या पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला पंचायत शामिल हैं. देश में तकरीबन में छह लाख से अधिक गांव हैं. जो छह हजार से अधिक ब्लॉक और 750 से अधिक जिलों में बंटे हुए हैं. पंचायती राज का तात्पर्य स्वशासन से है और यह व्यवस्था शासन के विकेंद्रीकरण के तहत की गई है.
पंचायत का मतलब 5 लोगों की सभा
पंचायत शब्द दो शब्दों ‘पंच’ और ‘आयत’ के मेल से बना है. पंच का अर्थ है पांच और आयत का अर्थ है सभा. पंचायत को पांच सदस्यों की सभा कहा जाता है जो स्थानीय समुदायों के विकास और उत्थान के लिए काम करते हैं और स्थानीय स्तर पर कई विवादों का हल निकालते हैं. पंचायती राज व्यवस्था का जनक लॉर्ड रिपन को माना जाता है. रिपन ने 1882 में स्थानीय संस्थाओं को उनका लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया था.
सबसे पहले राजस्थान में लागू हुई यह व्यवस्था
अगर देश में किसी गांव की हालत खराब है तो उस गांव को सशक्त और विकसीत बनाने के लिए ग्राम पंचायत उचित कदम उठाती है. बलवंत राय मेहता समिति के सुझावों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सबसे पहले 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया था. इसके कुछ दिनों के बाद आंध्र प्रदेश में भी इसकी शुरुआत हुई थी.
तीन स्तर में होती है पंचायती राज व्यवस्था
साल 1957 में बलवंत राय मेहता कमेटी का गठन हुआ था जिसने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की बात कही थी. इसके बाद 1977 में अशोक मेहता समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश की थी जिसमें उन्होंने द्विस्तरीय शासन व्यवस्था का जिक्र किया था लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका था. बलवंत राय मेहता कमेटी के सुझावों को सबसे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1959 में लागू करवाया था. 1. ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत की व्यवस्था 2. ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति की व्यवस्था. और 3. जिला स्तर पर जिला परिषद की व्यवस्था की गई.
पहली बार 24 अप्रैल, 2010 को मनाया गया यह दिवस
पंचायती राज दिवस पहली बार 24 अप्रैल, 2010 को मनाया गया था. यह दिन 1992 में संविधान के 73 वें संशोधन के अधिनियमन का प्रतीक है. इस ऐतिहासिक संशोधन के जरिए जमीनी स्तर की शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया गया और पंचायती राज नाम की एक संस्था की बुनियाद रखी गई. पंचायती राज मंत्रालय हर साल 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाता है. 73वें संशोधन के तहत संविधान में भाग-9 जोड़ा गया था. जिसके अंतर्गत पंचायती राज से संबंधित उपबंधों की बात की गई है. साल 2010 से 24 अप्रैल को हर साल ये दिवस मनाया जा रहा है. इस दिन बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को पुरस्कृत करने का भी प्रावधान किया गया है.
इस दिन देश भर की पंचायतों में होते हैं कार्यक्रम
इस दिन, देश भर की पंचायतों के विभिन्न प्रतिनिधि संवाद में हिस्सा लेते हैं और अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए प्रेरित करते हैं. इस प्रकार, पंचायत का अर्थ पांच सदस्यों की एक सभा है जो स्थानीय स्तर पर विवादों को हल करके स्थानीय समुदाय के जीवन को बढ़ाने का काम करती है।

