

आई फ्लू के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल आता है कि आई फ्लू सिर्फ वयस्कों को होता है या यह नवजात शिशुओं को भी हो सकता है। हम आपको बता दें कि आई फ्लू की समस्या हम बड़ों की तरह नवजात शिशुओं में भी हो सकती है। नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतना विकसित नहीं होती। ऐसे में उन्हें इन्फेक्शन या बीमारियां जल्दी अपनी चपेट में ले लेती हैं। नवजात शिशुओं को आई फ्लू होने पर बुखार, खांसी, आंख का लाल होना और आंख से पानी आने जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। नवजात शिशु को होने वाला आई फ्लू ठीक न होने पर गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए डॉक्टर इस इन्फेक्शन से बचाव के लिए कुछ टिप्स बताते हैं। इन टिप्स को आगे विस्तार से जानेंगे। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने डफरिन अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सलमान खान से बात की।
1. नवजात शिशु को वैक्सीन लगवाएं-
नवजात शिशु में इन्फेक्शन का खतरा घटाया जा सके, इसके लिए जन्म के समय जरूरी वैक्सीन लगवाएं। इससे शिशु के शरीर में एंटीबॉडीज बनेंगी। शिशु को फ्लू वैक्सीन 6 महीने की उम्र में लगवाई जा सकती है। आप डॉक्टर की सलाह पर शिशु को फ्लू वैक्सीन लगवा सकते हैं।
2. साफ-सफाई का ख्याल रखें-
नवजात शिशु को आई फ्लू से बचाने के लिए साफ-सफाई पर गौर करें। अपने हाथों को साबुन और पानी से साफ करें फिर ही शिशु को गोद में उठाएं। गंदे हाथों से शिशु को संक्रमण हो सकता है। खांसने या छींकने पर शिशु के पास न जाएं। आई फ्लू एक एयरबोर्न डिजीज है, यह हवा के जरिए फैलता है।
3. नवजात शिशुओं के खिलौनों को साफ रखें-
खुद को और शिशु को साफ रखने के साथ-साथ आपको शिशु के खिलौने और उसके इस्तेमाल की हर वस्तु को साफ रखना है। शिशु के खिलौनों को साफ रखने के लिए उन्हें गर्म पानी में उबालें। इसके अलावा शिशु के कमरे में फ्रेश एयर है या नहीं यह भी सुनिश्चित करें।
4. बीमार व्यक्ति से शिशु को दूर रखें
अगर आपके घर में कोई बीमार व्यक्ति है तो उससे शिशु को दूर रखें। नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण वे मौसमी बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। अगर आपको भी सर्दी-जुकाम या बुखार है, तो कुछ समय के लिए शिशु से दूरी बरतें। नवजात शिशु के कमरे की चादर को रोज बदलना चाहिए। साथ ही जिस तौलिए से आप शिशु की त्वचा को साफ करते हैं उसे रोज साफ करें।
5. शिशु को स्तनपान कराएं
नवजात शिशु को इन्फेक्शन और बीमारियों से बचाने के लिए मां का दूध पिलाएं। मां के दूध में शिशु के लिए पर्याप्त पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इससे आई फ्लू जैसे इन्फेक्शन से बचाव होता है। बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन के कारण आई फ्लू होता है। ब्रेस्टमिल्क में एंटीबॉडीज होती हैं। इससे शिशु को इन्फेक्शन से बचाने में मदद मिलती है।
