8 जून को सरगुजा जिले के सरकारी अस्पताल में महिला की फर्श पर डिलीवरी हो गई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था।इस पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए थे। इस आदेश के बाद अपर मुख्य स्वास्थ्य सचिव ने अस्पतालों में फोटो और वीडियो बनाने पर रोक लगा दी है, इस संबंध में दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।बता दें कि अपर मुख्य स्वास्थ्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने सभी हेल्थ सेंटरों, सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों में फोटो और वीडियो बनाने पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।उन्होंने कहा ऐसी घटनाओं से न सिर्फ अस्पताल की छवि खराब होती है, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों की निजता भी भंग होती है।

हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
बता दें कि 11 जून मंगलवार को बिलासपुर हाईकोर्ट (में डिलीवरी वाली जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
इस दौरान हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई और चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने फटकार भी लगाई थी।
बेंच ने कहा था कि सरकार जब दूरस्थ इलाकों में सुविधाओं का लाभ पहुंचाने व देने का दावा करती है तो अफसर क्या कर रहे हैं।
डिवीजन बेंच ने हेल्थ डिपार्टमेंट के चीफ सेक्रेटरी, स्वास्थ्य संचालक से इस मामले में जवाब देने के निर्देश दिए थे।
साथ ही सरगुजा के कलेक्टर, CMHO और सिविल सर्जन समेत अफसरों को शपथ पत्र के साथ जवाब देने को कहा था।
बता दें कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट अंबिकापुर जिले के सरकारी हॉस्पिटल में फर्श पर डिलीवरी कराने के मामले को जनहित याचिका मान कर सुनवाई कर रही है।
ये था पूरा घटनाक्रम
बता दें कि 8 जून को दरिमा के नवानगर ग्राम पंचायत की 25 वर्षीय गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हुई तो मितानिन उसे नवानगर उपस्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंची।
उस समय अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था और न ही नर्स मौजूद थीं। प्रसव पीड़ा बढ़ने पर मितानिन ने प्रसूता को जमीन पर लिटाकर डिलीवरी कराई।
इस दौरान परिजनों और मितानिन ने कई बार डॉक्टर और नर्स को फोन लगाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
